उत्तराखंड की वादियों में जेन-जी का जलवा, पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में जुटीं 500 बेटियां
उत्तराखंड में दर्पण समिति के माध्यम से जेन-जी युवतियां पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और प्लास्टिक मुक्ति जैसे अभियानों में सक्रिय हैं।

नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ रहे युवा। जागरण

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हेमंत बिष्ट, अल्मोड़ा। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की मुहिम में जेन-जी युवतियां भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। दर्पण समिति के माध्यम से वे पौधारोपण, प्लास्टिक मुक्ति, कचरा प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के बारे में लोगों को जागरूक कर रही हैं।
नगर से ग्रामीण क्षेत्रों तक चल रहे इन प्रयासों का उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाना और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है। करीब 2011 में शुरू हुई दर्पण समिति वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और वन पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है।
समिति की सचिव विभु कृष्णा के अनुसार, अब तक 500 से अधिक युवतियां संस्था से जुड़कर विभिन्न गतिविधियों में योगदान दे चुकी हैं। समिति ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
लोक संस्कृति और आधुनिक माध्यमों से पहुंचा रहीं संदेश
लोक संस्कृति और आधुनिक संचार माध्यमों से संदेश पहुंचाने के लिए नुक्कड़ नाटक, लोक नाटक, कहानियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और डाक्यूमेंट्री फिल्मों का सहारा लिया जाता है। गांव-गांव में चल रहे अभियानों के जरिए पर्यावरण संबंधी चुनौतियों और उनके समाधान की जानकारी दी जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका पर भी ध्यान
दर्पण समिति का उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ों में आजीविका के नए अवसरों को बढ़ावा देना भी है। इसके लिए वन संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
