जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा: जिले में बहुमूल्य पेड़ों की कटान व उनकी लकड़ियों की तस्करी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। वहीं ग्रामीणों की तरफ से इस संबंध में कई बार शिकायती पत्र अधिकारियों को दिए जाने व कार्रवाई की मांग की जा चुकी है। हर बार की तरह वन विभाग फील्ड स्टाफ की कमी के चलते अपेक्षित कार्रवाई करने में खुद को बेबस पा रहा है। नई नियुक्तियों को लेकर शासन को विभागीय अधिकारियों की तरफ से कई बार लिखित तौर पर अवगत कराकर भर्ती करने की मांग की गई है।

डीएफओ पंकज कुमार ने बताया कि वनों की अवैध कटान व बहुमूल्य लकड़ी की तस्करी को रोकने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इस कार्रवाई में सबसे अधिक बाधा स्टाफ की कमी आड़े आ रही है। उनका कहना था कि जिले में वन दारोगा व फॉरस्ट गार्ड के पदों की बेहद कमी है। जिसका असर अवैध कटान व तस्करों पर प्रभावी कार्रवाई करने में पड़ रहा है। डीफओ का कहना था कि फॉरस्ट गार्ड के कम से कम 65 प्रतिशत पदों पर भर्ती नहीं हो सकी है। वहीं वन दारोगा के कम से कम 35 प्रतिशत पद खाली चल रहे हैं। इसका असर यह है कि फील्ड में मूवमेंट के बाद भी स्थानीय स्तर पर लकड़ी की अवैध कटान रोकने में विभाग को मुश्किलें आ रही हैं। ऊपर से विभागीय कार्यों से लेकर प्रशासनिक बैठकों में भी समय देना होता है। डीएफओ ने बताया कि खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने की दिशा में शासन को पत्र लिखकर मांग की जा चुकी है। इसके बाद कुछ हद तक बीते दिनों भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के संकेत मिले थे। अचानक कुछ तकनीकी कारणों से यह प्रक्रिया वहीं पर रुक गई है। पूरी कोशिश है कि सीमित संसाधनों में वनों की कटान व लकड़ी की तस्करी व उसमें लिप्त लोगों पर रोक लगाने के साथ कार्रवाई की जाए। अभी दोबारा पद संभाले हुए कुछ दिन ही हुए हैं। जल्द ही तस्करों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

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