संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : कोहरे के कोहराम से बचने के लिए जहां नियमों का अनुपालन काफी जरूरी है। वहीं ओवर स्पीड से बचकर हादसों से बचा जा सकता है। जल्दी पहुंचने के लिए वाहनों को तेज दौड़ाना महज दिमागी फितूर ही साबित होता है। तेज वाहन दौड़ाने से समय की बचत नहीं होती, बल्कि खतरा और बढ़ जाता है।

पर्वतीय क्षेत्रों की बात करें तो यहां अक्सर बड़े हादसे ओवर स्पीड के कारण सामने आते हैं। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के अनुरूप ही वाहनों को दौड़ाना चाहिए। सड़क सुरक्षा के नियमों के बारे में जानकारी होना भी वाहन चालकों को होना काफी जरूरी है। तभी पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रहे हादसों को रोकने में सफलता मिल सकेगी।

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लाइसेंस के लिए योग्यता निर्धारित

वाहन चालकों को लाइसेंस देने के लिए आरटीओ द्वारा योग्यता भी निर्धारित की गई है। कामर्शियल वाहनों के चालकों को लाइसेंस के लिए योग्यता आठवीं रखी गई है। जबकि कंडक्टर के लिए यह योग्यता बारहवीं पास है। सिर्फ व्यक्तिगत लाइसेंस के लिए किसी भी शैक्षिक योग्यता की जरूरत नहीं है। लाइसेंस लेने से पूर्व संबंधित व्यक्ति को शरीरिक रूप से भी स्वस्थ होना चाहिए। इसके लिए परिवहन महकमा स्वास्थ्य अधिकारियों की मेडिकल रिपोर्ट भी अनिवार्य तौर पर लेता है।

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झपकी आई तो हो सकता है हादसा

वाहन चलाते समय सर्तकता बरतना जरूरी है। कामर्शियल वाहनों में इस बात का ख्याल रखना काफी जरूरी हो जाता है कि चालक से निर्धारित अवधि में ही वाहनों का संचालन कराया जाए। अधिक लंबा सफर करने पर चालकों को झपकी आने लगती है। जिससे सड़क हादसों का खतरा बना रहता है। जरूरत के अनुसार चालकों को अपर डिपर का भी प्रयोग करना चाहिए।

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सड़क हादसों से बचने के लिए समय समय अभियान चलाए जाते हैं। इसके साथ ही कामर्शियल वाहन चालकों का स्वास्थ्य व नेत्र परीक्षण भी कराया जाता है। जिन चालकों की आंखों में दिक्कत होती है। उन्हें चश्मा भी उपलब्ध कराया जाता है। सड़क हादसों से बचने के लिए सर्तकता काफी जरूरी है।

-आलोक जोशी, एआरटीओ, अल्मोड़ा

Posted By: Jagran

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