संवाद सहयोग, अल्मोड़ा : स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय व्यक्तित्व विकास संगोष्ठी के दूसरे दिन विभिन्न क्षेत्रों से आए शोधाíथयों ने स्वामी विवेकानंद के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता विषय पर अपने विचार रखे और शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान कहा गया कि आने वाले कई दशकों तक स्वामीजी के विचार मानव समाज को वसुधैव कुटुंबकम की शिक्षा देता रहेगा।

राजकीय इंटर कालेज में आयोजित संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के प्रारंभ में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र से आए इतिहासकार एवं पुराविद् प्रो. एमपी जोशी ने आधार व्याख्यान दिया। उन्होंने वर्तमान में स्वामी विवेकानंद के विचारों की वास्तविक आवश्यकताओं और प्रासंगिकता बताई। प्रबुद्ध भारत के संपादक स्वामी नरसिम्हानंद ने कहा कि सम्पूर्ण समाज को धारण करने वाली शक्ति ही धर्म है और इसके महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि विश्व शांति के लिए स्वामी विवेकानंद के विचारों को समझना आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने भारतीय संस्कृति को विश्व बंधुत्व की संस्कृति बताया। स्वामी निखिलेश्वरानंद ने विश्व शांति व मानसिक शांति को प्राप्त करना और अंतर्मन की दिव्यता को जागृत करने की बात कही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज सेविका राधा भट्ट ने नारीत्व जागृति व युवा उत्थान पर अपने विचार रखे। अध्यक्षता करते हुए स्वामी शुद्धिदानंद ने भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता पर गर्व करने की बात कही। तकनीकि सत्र में शोध छात्र छात्राओं ने अपने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। संचालन डॉ. दिवा भट्ट एवं डॉ. चंद्र प्रकाश फुलोरिया ने किया। इस दौरान राम कृष्ण कुटीर के अध्यक्ष स्वामी ध्रुवेशानंद, डॉ. जेसी भट्ट, मनोहर नेगी, अनुराग महाराज, रवि विद्यार्थी, अनिरुद्ध जडे़जा, जगदीश पांडे, दीप्ति रावत, विमला तिवारी, दीपा जोशी, गंगा पांडे, प्रताप सिंह भंडारी, कुलदीप भंडारी, राखी, गोविद सिंह, संजना, दिव्यांशा, राहुल, हरिदत्त, देवेंद्र सिंह, रेखा, नवीन आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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