संवाद सहयोगी, रानीखेत : पृथक रानीखेत जिले के लिए सभी संगठन एक मंच पर आ गए हैं। तय हुआ कि पूर्व में घोषित सभी चार प्रस्तावित जिलों के गठन को एकजुट होकर संघर्ष किया जाएगा। इसके तहत पंचायत प्रतिनिधियों व आम ग्रामीणों को भी साथ लिए जाने का निर्णय लिया गया। खासतौर पर रामगंगा वालों से वार्ता कर सहमति कायम करने की रणनीति बनाई जाएगी। निर्णायक जंग के लिए चार सितंबर को कोर कमेटी का गठन व छह को बाजार बंद व जुलूस प्रदर्शन का ऐलान किया गया।

शिव मंदिर सभागार में पूर्व निर्धारित घोषणा के तहत शनिवार शाम पृथक रानीखेत जनपद के मुद्दे पर आमजन व सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। इसमें व्यापारी नेताओं के साथ ही सामाजिक व सियासी संगठनों के लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने एक सुर से कहा कि 15 अगस्त 2011 को तत्कालीन भाजपा सरकार ने जिन चार नए जिलों रानीखेत, डीडीहाट, यमुनोत्री व कोटद्वार की घोषणा की थी, अब जनभावनाओं के अनुरूप उन्हें विधिवत नया जनपद बना देना चाहिए।

तय हुआ कि सभी नए जिलों के लिए जो संयुक्त संघर्ष समितियां गठित की गई हैं, सभी एकजुट होकर संघर्ष को मुकाम तक पहुंचाएंगी। यह भी निर्णय लिया गया कि चार अगस्त को कोर कमेटी गठित कर छह को आहूत बंद को सफल बनाने के बाद छात्र व अन्य संगठनों खासतौर पर ग्राम पंचायत स्तर पर भी जनसमर्थन जुटाया जाएगा। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों को नए जिले की लड़ाई में शामिल किया जाएगा।

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जिले न बने तो चुनावों का बहिष्कार

सर्वदलीय आम बैठक में यह भी ऐलान किया गया कि यदि रानीखेत को नया जिला घोषित नहीं किया गया तो आने वाले लोकसभा, निकाय व पंचायत चुनावों का बहिष्कार किया जाएगा। इसी सिलसिले में छह को जुलूस निकाल एसडीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजा जाएगा।

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ये रहे मौजूद

शिवमंदिर धर्मशाला समिति अध्यक्ष कैलाश पांडे, कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष मोहन नेगी, व्यापार मंडल नगर अध्यक्ष भगवंत नेगी, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष हीरा रावत, रंगकर्मी गोपाल रावत, संजय रौतेला, हर्षव‌र्द्धन पंत, दीपक पंत, मनोज पंत, दीपक अग्रवाल, सीमा जसवाल, सुनीता डाबर, कमलेश बोरा, उमेश भट्ट, अगस्त लाल साह, ललित असवाल, डीएन बड़ोला, अतुल जोशी, संजय पंत, विनोद कुमार, त्रिभुवन शर्मा, संदीप बंसल, कुलदीप कुमार, कामरान कुरैशी आदि।

Posted By: Jagran