जेएनएन, अल्मोड़ा/ रानीखेत/द्वाराहाट : हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म फिर जलाकर मार डालने के मामले में पहाड़ भी सुलग उठा है। महिलाओं ने इसे क्रूरतम वारदात करार देते हुए दोषियों को मृत्युदंड की मांग उठाई है। वहीं युवाओं ने मुंह पर पट्टी बांध गांधी पार्क में विरोध जता, गहरी संवेदना जताई। बाद में दुष्कर्म व हत्या के आरोपितों को सांकेतिक फांसी दी गई। युवाओं ने मंगलवार को गांधी पार्क में मुंह पर पट्टी बांध एक घंटे का मौन रखा। इस मौके पर मेघा डसीला, प्रीति आर्या, निर्मल रावत, संजीव कम्र्याल, आशीष पंत, धीरज तिवारी, सुनील ग्वाल, ललित सतवाल, अभिषेक रावत, वेद प्रकाश बिनवाल, दीपक तिवारी, नवल बिष्ट, आशुतोष रावत, कमल नेगी, मनीष तिवारी, नवीन कनवाल, विनय सैलानी, रोहित जोशी, सूरज वाणी, शिवम पांडे, उमेश गुरुरानी आदि मौजूद रहे।

====== नारी सुरक्षा लगातार खतरे में : सुनीता

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने एडीएम बीएल फिरमाल के जरिये राष्ट्रपति को पत्र भेज तेलंगाना समेत विभिन्न राज्यों में महिलाओं पर हो रहे संगीन अपराध पर अंकुश व सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग उठाई। कहा कि ये अपराध स्पष्ट करते हैं कि निर्भया के बाद महिला हिसा के खिलाफ बने कड़े नियम कानून पर केंद्र व राज्य सरकारें पालन नहीं करा रही। यह महिला सुरक्षा एजेंसियों की निष्क्रियता को भी दर्शाती है। पत्र भेजने वालों में समिति की प्रांतीय अध्यक्ष सुनीता पांडेय, जिला उपाध्यक्ष अजरा परवीन, सचिव राधा नेगी, हीरा देवी, भावना जोशी, पूनम तिवारी आदि शामिल हैं। ================

आरोपितों को मिले कड़ी सजा : रेखा उपपा कार्यकर्ताओं ने भी जघन्य घटना को शर्मनाक व मानव समाज को कलंकित करने वाला बताया। पार्टी की महिला प्रमुख रेखा धस्माना व केंद्रीय सचिव आनंदी वर्मा ने कहा आरोपितों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इस मौके पर अनीता बजाज, चंदूपंत तिवारी, रेशमा परवीन, किरन आर्या, हीरा, भारती पांडे, राजू गिरि, मो.शाकिब, भावना पांडे, लीला आर्या, गोपाल, हेमा पांडे आदि मौजूद रही। ===============

'हैदराबाद की जघन्य घटना ने दिल दहला दिया है। इससे साफ है कि निर्भया काड से भी लोगों ने सबक नहीं लिया। महिला डॉक्टर के दोषियों को सरेराह अंग भंग कर उन्हें मृत्युदंड देना चाहिए। यह गंदी मानसिकता वालों के लिए बड़ा सबक होगा।

- नंदिता भट्ट, ज्येष्ठ उपप्रमुख द्वाराहाट' =================

'ऐसे दुष्कृत्य पर सीधे मृत्युदंड का प्रावधान हो। यह बड़ा दुर्भाग्य है कि नारी को देवीस्वरूप मानने वाले देश में निर्भया कांड के बाद उच्चतम न्यायालय के आदेश बाद बने कड़े कानून के बावजूद महिलाओं के साथ क्रूरतम वारदात पर लगाम नहीं लग सकी है। इस मामले में सांसद, विधानसभा व महिला अधिकार व हितों को बने संगठनों की चुप्पी बेहद गंभीर है।

- रचना रावत, पूर्व प्रमुख ताड़ीखेत'

Posted By: Jagran

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