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कैप्टन बनने से एक दिन पहले राजौरी में अल्मोड़ा के लेफ्टिनेंट हुए बलिदान, सैन्य सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई

Published: Sun, 07 Jun 2026 09:13 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में 'ऑपरेशन शेरूगली' के दौरान अल्मोड़ा के लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी गहरी खाई में गिरने से बलिदान हो गए।

अल्मोड़ा के पांडेखोला स्थितआवास में बलिदानी का पार्थिव शरीर पहुंचने पर रोती दादी, माता-पिता व स्वजन। जागरण

अल्मोड़ा के पांडेखोला स्थितआवास में बलिदानी का पार्थिव शरीर पहुंचने पर रोती दादी, माता-पिता व स्वजन। जागरण 

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जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सेना के विशेष सर्च अभियान ‘आपरेशन शेरूगली’ का नेतृत्व करने के दौरान अल्मोड़ा के लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शनिवार को गहरी खाई में गिरने से बलिदान हो गए।

25 वर्षीय बीरेश्वर की उत्कृष्ट सेवा को देखते हुए सात जून को उन्हें कैप्टन पद पदोन्नति मिलनी थी लेकिन सेना के विमान से घर पहुंचा उनका तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर। सैन्य सम्मान के साथ सैकड़ों नम आंखों ने अंतिम विदाई दी।

Lieutenant Bireshwar Goswami

जम्मू में राजौरी के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में चल रहे घेराबंदी कर आतंकियों की तलाश के लिए चलाए जा रहे सर्च अभियान के दौरान पांच असम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी चोटी से फिसल कर गहरी खाई में गिर गए।

ieutenant Bireshwar Goswami family

रविवार दोपहर बाद बलिदानी का पार्थिव शरीर पंतनगर एयरपोर्ट तक सेना के विमान से और वहां से आर्मी हेलीपैड अल्मोड़ा हेलीकाप्टर से लाया गया। जहां सैन्य अधिकारियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

वहां से पांडेखोला स्थित आवास पर बलिदानी की पार्थिव देह पहुंचते ही लोग जुटने लगे। बलिदानी की दादी नंदी देवी, माता सरस्वती व पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी बदहवास हो गए।

tribute to Lieutenant Bireshwar Goswami

अंतिम यात्रा विश्वनाथ घाट के लिए निकली तो सैन्य अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों व आमजन ने बलिदानी के जयकारे लगाए तो माहौल गमगीन हो गया। चाचा तारा नाथ गोस्वामी और भाई अमित गोस्वामी ने मुखाग्नि दी।

Lieutenant Bireshwar Goswami during passing out

जून 2024 में मिला था कमीशन

बीरेश्वर वर्ष 2023 में संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) परीक्षा उत्तीर्ण कर सेना में भर्ती हुए थे। आइएमए देहरादून में प्रशिक्षण के बाद जून 2024 में कमीशन मिला और वह थल सेना की पांच असम रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट बने।

बीरेश्वर गोस्वामी मूल रूप से बग्वालीपोखर के बाड़ी गांव के निवासी थे। उनका परिवार वर्तमान में अल्मोड़ा नगर के पांडेखोला में निवास करता है। पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी भनोली तहसील में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी व माता सरस्वती देवी बल्सा, हवालबाग में शिक्षिका हैं। भाई अमित भी सरकारी सेवा में हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक संदेश में कहा कि सैन्यभूमि उत्तराखंड के वीर सपूत अल्मोड़ा निवासी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी ने आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान मातृभूमि की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है।

मां भारती की सेवा के प्रति उनका समर्पण, अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा सदैव देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान एवं शोकाकुल स्वजन को कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

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