राजौरी में सर्च ऑपरेशन के दौरान सेना का कैप्टन बलिदान, डोरी माल जंगल में आतंकियों की चल रही थी तलाशी
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकियों की तलाश में चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के कैप्टन बीरेश्वर गोस्वामी का बलिदान हो गया।
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राजौरी में सर्च ऑपरेशन के दौरान सेना का कैप्टन बलिदान। फाइल फोटो
HighLights
राजौरी के डोरी माल जंगल में अभियान।
कैप्टन बीरेश्वर गोस्वामी का हुआ बलिदान।
सेना की 5 असम यूनिट से संबंधित थे।
जागरण संवाददाता, राजौरी। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की मंजाकोट तहसील के डोरी माल जंगल क्षेत्र में आतंकियों की तलाश में चल रहे बड़े सर्च ऑपरेशन के दौरान शनिवार शाम भारतीय सेना के एक कैप्टन का बलिदान हो गया। बलिदानी अधिकारी की पहचान कैप्टन बीरेश्वर गोस्वामी के रूप में हुई है, जो सेना की पांच असम यूनिट से संबंधित बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद पूरे सैन्य और प्रशासनिक तंत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
जानकारी के अनुसार, डोरी माल के घने जंगलों में पिछले कई दिनों से सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संयुक्त तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों ने इलाके में बड़े स्तर पर घेराबंदी कर रखी थी और लगातार जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी था। इसी अभियान में भाग लेने के लिए कैप्टन बीरेश्वर गोस्वामी भी अपनी टीम के साथ कई दिनों से डोरी माल क्षेत्र में तैनात थे।
लगातार तबीयत बिगड़ने से हुए बलिदान
सूत्रों के अनुसार, शनिवार शाम जंगल के अंदर अभियान के दौरान अचानक कैप्टन बीरेश्वर गोस्वामी की तबीयत बिगड़ गई। मौके पर मौजूद जवानों ने तत्काल उन्हें प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने का प्रयास किया और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया, लेकिन उनकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई।
घटना के बाद बलिदानी कैप्टन का पार्थिव शरीर सेना के 150 जनरल अस्पताल राजौरी लाया गया, जहां आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। सैन्य सूत्रों के अनुसार सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर अखनूर भेजा जाएगा, जहां संबंधित यूनिट के अधिकारी और जवान पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
सेना के अधिकारियों समेत स्थानीय लोगों ने भी गहरा दुख व्यक्त किया
डोरी माल जंगल क्षेत्र में पिछले कई दिनों से चल रहा यह सर्च ऑपरेशन सुरक्षा एजेंसियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। घना जंगल, दुर्गम पहाड़ियां और लगातार बदलता मौसम जवानों के लिए कठिन परिस्थितियां पैदा कर रहा है। इसके बावजूद सुरक्षा बल पूरी मुस्तैदी के साथ अभियान चला रहे हैं ताकि क्षेत्र में छिपे आतंकियों का पता लगाया जा सके।
कैप्टन बीरेश्वर गोस्वामी को एक जांबाज और समर्पित अधिकारी के रूप में जाना जाता था। साथी जवानों के अनुसार वह हमेशा अग्रिम मोर्चे पर रहकर नेतृत्व करते थे और हर अभियान में पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते थे। उनके बलिदान की खबर सामने आने के बाद सेना के अधिकारियों समेत स्थानीय लोगों ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है।
वहीं, पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस तथा सेना की अतिरिक्त टुकड़ियां जंगल क्षेत्र में तैनात की गई हैं और तलाशी अभियान पहले की तरह जारी है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग करने की अपील की है। देश सेवा में कैप्टन बीरेश्वर गोस्वामी का यह सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
