संवाद सहयोगी, मानिला (रानीखेत) : काश्तकारों को मशरूम व जड़ी बूटी उत्पादन के लिए प्रेरित करने के मकसद से विशेष प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने मौजूदा चुनौतियों के मद्देनजर मशरूम की खेती को पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की आर्थिकी का आधार बताया। साथ ही जड़ी बूटी व मशरूम उत्पादन को आगे आए छह प्रगतिशील किसानों को किट भी मुहैया कराए गए।

मानिला संघर्ष समिति व हिमालय सोसियो इकोनोमिक डेवलपमेंट सोसाइटी दिल्ली के तत्वावधान में काश्तकारों को मशरूम व जड़ी बूटी उत्पादन का प्रशिक्षण देने को जीआइसी में दो दिनी प्रशिक्षण शिविर लगा। विजय सिंह गुटोला (टिहरी), सुरेंद्र बिष्ट (अहमदाबार), प्रमोद बिष्ट (द्वाराहाट) ने मशरूम तथा वीरेंद्र राणा ने जड़ी बूटी उत्पादन की बारीकियों की जानकारी दी। साथ ही नारायण सिंह ने कैरियर काउंसिलिंग के जरिए युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के गुर बताए। जड़ी बूटी विशेषज्ञ नारायण सिंह बिष्ट ने कहा कि मानिला क्षेत्र में सर्व गंधा, बड़ी इलायची, तेज पत्ता, चंदन, सतावर व अगरकर उत्पादन की संभावनाएं अधिक हैं और काश्तकार इनका उत्पादन कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। संघर्ष समिति अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह के अनुसार स्वरोजगार के माध्यम से किसानों की आर्थिकी बेहतर बनाने के लिए आगे भी प्रशिक्षण जारी रहेंगे। इस दौरान नीरज बवाड़ी, महेश उपाध्याय, रमेश रावत, वीरेंद्र बंगारी आदि मौजूद रहे।

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ये काश्तकार हुए चयनित

= कुंदन सिंह (डढ़ोली), जोधा सिंह (मिझोड़ा), हिम्मत सिंह (बरकिंडा), महेश जोशी (देघाट), धन सिंह (मछोड़) व अशोक कुमार (गोगिला) आदि।

Posted By: Jagran