संवाद सहयोगी, चौखुटिया : देवभूमि उत्तराखंड की धरती में मां-नंदा को आराध्य कुल देवी के रूप में माना जाता है। इसलिए यहां स्थान स्थान पर नंदा देवी पूजन मेलों की परंपरा सदियों से चली आ रही है। जो लोगों के अटूट आस्था व श्रद्धा से जुड़े हैं। गेवाड़ की रंगीली धरती में जाबर कोट्यूड़ा-ताल में हर वर्ष नंदा देवी पूजन मेला पूरे श्रद्धाभाव से मनाने की परंपरा है।

इस वर्ष नंदा देवी पूजन मेला शुक्रवार से मुख्य ड्योडी टेड़ागांव में प्रारंभ हो गया है। विधिवत शुभारंभ सुबह पारंपरिक रीति रिवाज के साथ मां का बार भरने के साथ हुआ। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर मां भगवती की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। आयोजन स्थल पर सुबह से ही लोगों का पहुंचने का क्रम शुरू हो गया। परंपरा के अनुसार दिन में 12 बजे तड़ागताल के नौगांव, पैली, न्यौनी, व बसरखेत से आमंत्रित देव डंगरिए गाजे बाजे के साथ मुख्य ड्योडी टेड़ागांव पहुंचे तथा मां नंदा समेत सभी डंगरियों ने देव दर्शन देकर लोगों को आशीर्वाद दिया।

-----------------------

डंगरियों को दूध से कराया स्नान

मुख्य ड्योडी में विधि विधान के साथ देव डंगरियों को दूध व पानी से स्नान कराया गया। इस दौरान बारी बारी से डंगरियों ने चारों दिशाओं को जौ व चावल उछालकर क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना की। साथ ही धूनी की परिक्रमा भी की। इस दौरान नौ लाख कत्यूरी देवताओं ने भी दर्शन दिए।

----------------------

इन डंगरियों ने दिए देव दर्शन

इस दौरान मां नंदा के रूप में राजे सिंह, हित देवता हरी राम आर्य, भूमियां देवता मदन सिंह, राछू देवता मोहन सिंह, दीपा-नंदन सिंह, नंदा वाहन के रूप में सुरेश राम, तडाग दलीप सिंह व उमराव सिंह आदि डंगरियों ने देश दर्शन दिए। अंत में संयोजक कुबेर सिंह कठायत ने सभी का आभार व्यक्त किया।

------------------------

नंदा देवी मेले का पूजन कार्यक्रम

=7 सितंबर-सभी ड्योडियों में रात को होंगे नंदा गीत

12 सितंबर-सायं 3 बजे जमराड़ से केला आमंत्रण

13 सितंबर-बगड़ी से केला की विदाई शाम को मूर्ति निर्माण व जाबर में रात्रि मेला

14 सितंबर-मूर्ति विसर्जन व भंडारे का आयोजन

Posted By: Jagran