संवाद सहयोगी, रानीखेत : सरकार व शासन के लाख दावों के बावजूद विषम भौगोलिक हालात वाले पर्वतीय क्षेत्रों में धरती के भगवान चढ़ने को तैयार नहीं हैं। अन्य सुदूर इलाकों की तो छोड़िए भारतरत्‍‌न पं. गोविंद बल्लभ पंत की जन्मस्थली खूंट धामस का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद के इलाज की बाट जोह रहा। यह हाल तब है जब यह अस्पताल सड़क मार्ग से लगा हुआ है। आलम यह है कि चिकित्सक के अभाव में आठ दस गांवों के ग्रामीणों की सेहत का जिम्मा फार्मासिस्ट के कंधों पर है। वह भी मात्र तीन दिन के लिए।

दरअसल, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खूंट धामस (हवालबाग ब्लॉक) में तैनात चिकित्सक का पीजी में चयन के कारण अरसे से पद रिक्त चला आ रहा है। मगर ग्रामीणों को नया डॉक्टर नसीब नहीं हो सका है। फार्मासिस्ट का तबादला हुए भी लंबा समय हो चुका। वैकल्पिक व्यवस्था तो की गई है लेकिन मात्र तीन दिन के लिए। ऐसे में आसपास के ग्रामीणों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही।

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ग्रामीणों में गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

ग्राम प्रधान ललितचंद्र पंत व धामस संघर्ष समिति अध्यक्ष जगदीश सिंह बिष्ट के अनुसार अस्पताल पर खूंट, धामस, शीतलाखेत, धारी समेत 10-12 गांवों के करीब आठ हजार की आबादी निर्भर हैं। मगर स्वास्थ्य सुविधा कुछ भी नहीं हैं। तीमारदार रोगियों को लेकर अल्मोड़ा, रानीखेत, हल्द्वानी के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उन्होंने चिकित्सक व फार्मासिस्ट की स्थायी नियुक्ति न होने पर जनांदोलन की चेतावनी दी है।

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डॉक्टरों की कमी पर एक नजर

= राज्य में चिकित्सकों के 2200 पद सृजित, तैनात 1800, 400 रिक्त खाली।

= फार्मासिस्ट के 1500 पदों का संवर्ग, 200 पद रिक्त, अल्मोड़ा जनपद में 156 पदों में 20 पद खाली।

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'चिकित्सकों का भारी अभाव है। शासन को पत्राचार किया है। जैसे ही डाक्टर मिलेंगे धामस में तैनाती कर दी जाएगी।

-डॉ. एके सिंह, एसीएमओ अल्मोड़ा'

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'अतिरिक्त पीएचसी के चिकित्सक डॉ. मनीष कुमार सिंह पीजी के लिए आगरा गए हैं। राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी तो है ही। सीएमओ के माध्यम से शासन को कई बार लिखा जा चुका। चौरा में तैनात फार्मासिस्ट को धामस का अतिरिक्त जिम्मा दिया है। ताकि रोगियों को परेशानी न हो।

-डॉ. रंजन तिवारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी'

Posted By: Jagran

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