संवाद सहयोगी,रानीखेत : जंगलों में धधकती आग से पशुपालकों के आगे चारे का भारी संकट खड़ा हो गया है। बारिश बिना खेत भी सूखे पड़े हैं ऐसे में पशुपालकों को पैसा खर्च कर चारा खरीदना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने पशुपालन विभाग से पशुपालकों को मवेशियों के लिए निश्शुल्क चारा उपलब्ध कराए जाने की माग की है।

पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश न होने से खेत सूखे पड़े हैं तो वहीं जंगलों में धधकती आग से चारा पत्ती भी जलकर खाक हो चुकी है। इस कारण पशुपालकों को मवेशियों के चारा के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। रविवार की देर शाम को रीची, कठालेख व गैरड़ के जंगलों में आग लगने से पशुओं के लिए चारा पत्त्ती जलकर खाक हो गई, जिससे हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कई पशुपालक बाजार से चारा खरीदने को मजबूर हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी बिगड़ रही है। पेयजल संकट भी पशुपालकों की दिक्कत बढ़ा रहा है। मवेशियों को दूरदराज ले जाकर बमुश्किल हलक तर हो रहे हैं। बेतालघाट, रामगढ़ व ताडी़खेत ब्लॉक के पशुपालक भी लगातार बिगड़ रहे हालात से परेशान हैं। कई पशुपालक पशुपालन का कार्य छोड़ने का तक मन बना चुके हैं। महेंद्र सिंह बिष्ट, दलीप सिंह, राजेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, कुंदन सिंह आदि लोगों ने पशुपालन विभाग से पशुपालकों को मवेशियों के लिए निश्शुल्क चारा उपलब्ध कराने की पुरजोर माग उठाई है। कहा कि उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दो टूक चेतावनी दी है कि यदि पशुपालकों के हितों से खिलवाड़ किया गया तो आदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।

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