संवाद सूत्र, ताड़ीखेत (रानीखेत) : पर्वतीय अंचल में बुजुर्ग साइटिका व जोड़ों के दर्द से परेशान रहने लगे हैं। तो नौनिहालों का पेट कमजोर पड़ रहा। क्षेत्रीय आयुवेर्दीय अनुसंधान संस्थान, आयुष मंत्रालय (सीसीआरएएस) के चिकित्सा शिविर में कुछ ऐसे ही तथ्य सामने आए। चिकित्सकों ने आयुर्वेद का महत्व बताते हुए ग्रामीणों व बच्चों को स्वस्थ्य रहने के तौर तरीके बताए।

विकासखंड के सिलोर पट्टी में सुदूर ड्योड़ाखाल स्थित एसबीएस मेमोरियल स्कूल में शुक्रवार को सीसीआरएएस की ओर से चिकित्सा शिविर लगाया गया। इसमें आसपास के गांवों के करीब 150 लोगों के ब्लड प्रेशर, डायबिटीज आदि का परीक्षण किया गया। डॉ. अनिल मंगल के अनुसार पहाड़ में बुजुर्ग में गठिया, महिलाओं में प्रदर व प्रसूत तथा बच्चों में उदर रोग का बढ़ना चिंताजनक है। उन्होंने इन रोगों से बचने के उपायों की जानकारी दी। कहा प्राथमिक स्तर पर उपचार करने से रोगों को फैलने से बचाया जा सकता है। इसके अलावा डॉ. अमित रॉय, डॉ. संजीव कुमार आदि ने भी लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। मरीजों को दवाईयां व उपचार के लिए सलाह दी। शिविर में सलोनी, सौलाधार, कोट्यूडा़, मनराल कोट्यूडा, पस्तौडा़, सेनरी,दूणी, घिंघारी, चमडोली, मिलोती आदि गावों के लोगों ने स्वास्थ्य की जांच करवाई।

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ये रहे मौजूद

बप्पा सरकार, सरिता कार्की, जेसी सिंह, पंकज रौतेला, रविंद्र कुंवर, चंदन बिष्ट, चंदन नेगी, बीरबल सिंह, आनंद बिष्ट, मदन रावत, बद्री मावडी़, राजेंद्र रावत, दिनेश रावत, गोपुली देवी, शाति देवी, अनीता बिष्ट, लीला देवी, मुकुंद, राजेंद्र सिंह, मदन नारायण, मोती सिंह, प्रेमा देवी, कुंदन राम व पीतांबर आदि।

Posted By: Jagran