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अल्मोड़ा की कोसी नदी का दर्द: 24 साल में 31 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरी सीवर लाइन योजना

Published: Thu, 10 Sep 2026 02:37 PM (GMT+05:30)

अल्मोड़ा में कोसी नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए 24 साल में 31 करोड़ खर्च होने के बावजूद सिर्फ ...और पढ़ें

अल्मोड़ा के फड़का गांव के समीप से नगर क्षेत्र का गंदा पानी कोसी नदी में मिलते हुए। जागरण

अल्मोड़ा के फड़का गांव के समीप से नगर क्षेत्र का गंदा पानी कोसी नदी में मिलते हुए। जागरण 

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चंद्रशेखर द्विवेदी, अल्मोड़ा। यह कोसी नदी है। कभी यह पहाड़ पर सड़कें कटने तो कभी भूस्खलन के कारण मलबा गिरने का दर्द झेलती है। यही नहीं, लाखों लोगों को पानी पिलाने और खेतों को सींचने वाली कोसी की निर्मलता को शहरों व कस्बों से आने वाला सीवेज सिस्टम की काहिली के कारण बीमारियों का वाहक बनाने पर तुला है।

प्रतिदिन नगर और पास के कस्बों का 50 लाख लीटर से अधिक सीवर जीवनदायिनी कोसी और सुयाल नदियों में जा रहा है। समय पर बजट नहीं मिलने से बीते 24 वर्ष में 31 करोड़ खर्च होने के बाद भी केवल 12 किमी ही सीवर लाइन बन पाई। अब नगर निगम क्षेत्र और आस-पास के गांवों को मिलाकर फिर से नया मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।

बख में एक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया

अल्मोड़ा शहर की गंदगी कोसी नदी में जाने से रोकने की योजना दो दशक बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। 24 वर्ष पहले 2002 में सीवर लाइन योजना के लिए फेज वन में 6.10 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। तब उप्र निर्माण एजेंसी सीएनडीएस ने कार्य किया था। इसके बाद 2005 में जल निगम की सर्वे शाखा ने 12.56 करोड़ लागत से दूसरे व तीसेर चरण का कार्य किया गया। इस दौरान साढ़े 10 किमी सीवर लाइन बन पाई। इस दौरान बख में एक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया।

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इसके बाद 15 वर्षों तक सीवर लाइन के लिए कोई धनराशि नहीं मिली। वर्ष 2023 में फिर सीवर लाइन बनाने के लिए 25.15 करोड़ मिले जिससे आठ किमी सीवर लाइन बिछाई जानी थी। 13 करोड़ खर्च कर इन वर्षों में केवल डेढ़ किमी ही सीवर लाइन बन पाई। 1.5 एमएलडी का पांडेखोला में एक एसटीपी निर्माणाधीन है।

लगातार बढ़ती आबादी, शहरीकरण और नगर निगम बनने के बाद अब जल निगम नए सिरे से सीवर लाइन का मास्टर प्लान बन रहा है। नए मास्टर प्लान की डीपीआर के अनुसार कुल 70 किमी लंबी सीवर लाइन का जाल शहर के विभिन्न वार्डों में बिछाया जाएगा। इसके अलावा पांच स्थानों पर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। डीपीआर जल्द ही शासन के पास धनराशि स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी।

कुमाऊं का सबसे पुराना शहर है अल्मोड़ा

ब्रिटिश शासकों ने 1864 में अल्मोड़ा को नगरपालिका बनाया। अंग्रेजों ने भी शहर को आधुनिक बनाने के लिए कार्य किए। 2024 में अल्मोड़ा नगर निगम बना। लेकिन 162 वर्ष के लंबा इतिहास समेटे अल्मोड़ा बजट के अभाव में आज भी सीवर लाइन जैसी मूलभूत समस्या से जूझ रही है।

  • चरण, वर्ष, धनराशि करोड़ में

  • पहला, 2002, 6.10
  • दूसरा, 2005, 12.56


फिर 2022 में नए सिरे से सीवर लाइन का कार्य 25.15 करोड़ की लागत से शुरु हुआ

सीवर लाइन के निर्माण के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। जल्द ही डीपीआर शासन को भेज दी जाएगी। जिसके बाद कार्य शुरु होगा। - संजीव वर्मा, अधिशासी अभियंता, जल निगम