संस, अल्मोड़ा : वन विभाग युग पुरुष स्वामी विवेकानंद के उस पैदल रास्ते को ईको टूरिज्म से जोड़ साहसिक पर्यटकों के लिए खोलेगा, जिसका उपयोग हिमालय पदयात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद ने किया था। पर्यावरण संरक्षण, वनों को बचाने में जनसहभागिता व जागरूकता के मकसद से डीएफओ महातिम सिंह यादव तथा प्रकृति प्रेमियों ने इसे ट्रैक रूट के रूप में इस्तेमाल कर 16 किमी का सफर तय किया। इस दौरान सैलानियों को रिझाने के लिए पहाड़ी रूट पर व्यू प्वाइंट्स भी तलाशे गए।

जैव विविधता से लबरेज शीतलाखेत स्याहीदेवी वन क्षेत्र को ईको टूरिज्म से जोड़ राज्य में मॉडल स्वरूप देने को कसरत तेज हो गई है। डीएफओ महातिम सिंह व उनकी टीम रविवार को नगर के खत्याड़ी गांव से पौधार व सैनार होकर कोसी घाटी में उतरे। नदी पार कर चाण, खूंट, धामस, नौला, सल्ला रौतेला की खड़ी चढ़ाई पार कर वन विश्राम गृह शीतलाखेत पहुंचे। इस दौरान धामस गांव में ग्राम प्रधान भरत बिष्ट, सरपंच पूरन सिंह, पूर्व प्रधान खीम सिंह, नौला में महेश चंद्र, सरपंच चंदन सिंह मेहता, सल्ला रौतेला में सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश पाठक, शीतलाखेत में स्याही देवी विकास मंच अध्यक्ष हरीश सिंह बिष्ट, गजेंद्र पाठक आदि ने डीएफओ व वन कर्मियों की टीम का स्वागत किया।

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लकड़ी के बजाय लौह हल का क्रेज बढ़ा

पैदल भ्रमण के दौरान ग्राम सैनार में लकड़ी के बजाय ग्रामीण स्याहीदेवी लौह हल का इस्तेमाल करते देखे गए। ग्रामीणों ने डीएफओ बताया कि लौह हल ने बहुपयोगी बांज, मेहल आदि पेड़ों का कटान रोकने में मदद दी है। यह परंपरागत हल की तुलना में हल्के व सस्ते भी होते हैं। यही वजह है कि वनाग्नि से झुलस चुका स्याही देवी वनक्षेत्र में प्राकृतिक रूप से चौड़ी पत्तियों का जंगल दोबारा विकसित हो रहा है। जैविविविधता भी बढ़ रही।

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इको टूरिज्म का प्लान तैयार

डीएफओ महातिम ने कहा कि शीतलाखेत स्याही देवी क्षेत्र में इको टूरिच्म को नया आयाम देने के लिए कार्ययोजना बनाई गई है। इसमें ट्रेल, वॉच टावर निर्माण आदि प्रस्तावित हैं। पैदल शीतलाखेत से नैनीताल मात्र 50 किमी की दूरी पर है। इससे पर्यटन व स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे। टीम में हरीश बिष्ट, लक्ष्मण सिंह नेगी, वन दरोगा भुवन लाल, वन बीट अधिकारी त्रिभुवन उपाध्याय, कुबेर आर्या, किरन तिवारी आदि शामिल रहे।

Edited By: Jagran