संस, मानिला : भराड़ीसैंण-गैरसैंण में उक्रांद कार्यकर्ताओं खासकर महिलाओं पर बर्बर लाठीचार्ज के खिलाफ गुस्सा बरकरार है। उक्रांद कार्यकर्ताओं ने तहसील मुख्यालय तक आक्रोश रैली निकाल प्रदर्शन किया। नारेबाजी के बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से इस्तीफा मांगा गया। साथ ही उच्च न्यायालय से पूरे प्रकरण की जांच कराने की पुरजोर वकालत भी की।

उक्रांद के सल्ट विस क्षेत्र प्रभारी राकेश नाथ की अगुवाई में बुधवार को कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। मौलेखाल मुख्य बाजार से जनाक्रोश रैली निकाली। राकेश नाथ ने कहा कि हर मोर्चे पर विफल मुख्यमंत्री अब दमनकारी नीति अपनाने लगे हैं। कहा कि महिलाएं बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार, पलायन रोकने को ठोस नीति, गैरसैंण स्थायी राजधानी, सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा में सुधार के लिए आवाज उठाने पहुंची थीं। मगर उनकी आवाज दबाने को लाठीचार्ज करा भाजपा सरकार ने 1994 में उत्तराखंड राज्य आदोलन के दौरान मुजफ्फरनगर सरीखी घटना की पुनरावृत्ति कर दी है। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम शिप्रा जोशी पाडे को ज्ञापन भी दिया। रैली में लीला देवी, हेमा देवी, इंदर रावत, गणेश रावत, चंदन सिंह, नवीन घनश्याल, सुमन देवी, गीता देवी, नरेंद्र आदि शामिल रहे। युवाओं ने सरकार का पुतला फूंका, नारेबाजी की

संस, चौखुटिया: भराडीसैंण (गैरसैंण) में प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में चौखुटिया में भी लोग सड़क पर उतर आए। गुस्साए युवाओं ने बुधवार शाम यहां क्रांतिबीर चौराहे पर एकत्र होकर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की एवं सरकार का पुतला फूंका। कहा कि प्रदेश सरकार तानाशाही पर उतर आई है। बेटी पढ़ाओ-बेटी बढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार महिलाओं का ही दमन कर रही है, जो निंदनीय है।

वक्ताओं ने आक्रोश भरे लहजे में कहा कि ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का हक नहीं है, जो अपनी ही जनता पर लाठीचार्ज कर रही है। सभी ने सरकार के खिलाफ संघर्ष का एलान किया। कार्यक्रम में उक्रांद के गजेंद्र सिंह नेगी, नारायण दत्त तिवारी, मोहन सिंह, ललित नैनवाल, कैलाश गिरि, केशर सिंह, हरी दत्त जोशी, शंकर कैड़ा, गगन कैड़ा आदि ने भागीदारी की।

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