संवाद सहयोगी, रानीखेत : विकासखंड ताड़ीखेत व बेतालघाट से सटे गावों में अब पेयजल संकट से निजात मिलने की उम्मीद जगी है। बूंद बूंद को तरस रहे ग्रामीणों का हलक तर करने के लिए विभागीय स्तर पर कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इसके तहत अंतरजनपदीय सीमा पर कोसी घाटी से पंपिंग योजना के निर्माण का खाका खींच लिया गया है। तकनीकी टीम ने सर्वे पूरा कर सात करोड़ का प्रस्ताव बना लिया है। इसे शासन को भेजा जा रहा है। ताकि योजना को जल्द धरातल पर उतारा जा सके।

अल्मोड़ा व नैनीताल जिले के सीमावर्ती गांव धारी, खैरनी, तल्ला व मल्ला बर्धो, हल्सौं, कोरण, नैनीचैक आदि तमाम गावों के बाशिंदे अरसे से पानी के लिए तरसते आ रहे हैं। संकटग्रस्त गांवों की लगभग चार हजार की आबादी बमुश्किल दूर दराज के स्रोतों से पानी का जुगाड़ करती है, जो नाकाफी साबित होता है। वर्तमान में हालात यह हैं कि मल्ला व तल्ला वर्धो के लोग नहर के पानी पर निर्भर हैं। अब जबकि गर्मी पीक पर है, ऐसे में जलजनित रोगों का खतरा भी मंडरा रहा है।

पानी की किल्लत से बेजार क्षेत्रवासी वषरें से पेयजल योजना की मांग उठाते आ रहे हैं। बीते वर्ष प्रगतिशील किसान विशन सिंह जंतवाल व अन्य ने तत्कालीन मुख्यमंत्री को संकट से अवगत कराया था। यह मुद्दा रतौड़ा पुल के उद्घाटन को पहुंचे पूर्व सीएम हरीश रावत के समक्ष भी उठा। तब उन्होंने पंपिंग योजना की घोषणा की थी। अब सत्ता बदलने के बाद विभागीय स्तर पर कवायद तेज हो गई है। इसके तहत बढेरी गांव के निकट कोसी नदी पर योजना के निर्माण की तैयारी कर ली गई है। विभागीय टीम ने सर्वे पूर्ण कर सात करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

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'करीब सात करोड़ की लागत से बनने वाली योजना का सर्वे कर लिया है। शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।

-नरेंद्र कुमार, जेई पेयजल निगम

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