वाराणसी, जेएनएन। जीवन शैली में बदलाव कर आप मधुमेह से छुटकारा पा सकते हैं। रोज एक घंटे शारीरिक श्रम करेंगे तो और ज्यादा बेहतर होगा। आयुर्वेद के अनुसार प्रमेह या मधुमेह 20 प्रकार के होते हैं। 10 कफ की, 6 पित्त की व 4 वात दोष की विकृति से उत्पन्न होते हैं। जब अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता और शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन को सही से ग्रहण नहीं कर पाती तब शर्करा का स्तर लगातार बढ़ता जाता है। इससे आंखे और किडनी तो प्रभावित होती ही है, ब्लड प्रेशर की भी समस्या होने लगती है। पेश है हिमांशु अस्थाना की रिपोर्ट...

 

मधुमेह के लक्षण    

अधिक प्यास व भूख लगना। 

नजर का धुंधलापन, 

बार-बार पेशाब करना 

चिड़चिड़ापन या घाव न भर रहा हो। 

आयुर्वेद में इलाज 

जामुन के सूखे हुए बीजों का चूर्ण, गुडमार के सूखे पत्तों का चूर्ण, बरगद के पेड़ की छाल से बना काढ़ा, शिलाजीत, मेथी दाना, ऑवला व करेले के रस का सेवन इत्यादि। इनका सेवन कर आप मधुमेह से बच सकते हैं। किसी योग्य वैद्य जरूर सलाह लें। राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय वाराणसी के काय चिकित्सा विभाग के वैद्य अजय कुमार के अनुसार चन्द्रप्रभा वटी, हरिशंकर रस के सेवन से शुगर का स्तर संतुलित रहता है।  

मधुमेह होने पर क्या करें

-आवश्यकता से अधिक भोजन न करें।

-जंक फूड व संरक्षित खाद्यान्नों का प्रयोग कम करें।

-शारीरिक व्यायाम को अपनी आदत में शुमार करें।

 

इन खतरों की ज्यादा आशंका

इससे हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर, आंखे व नर्वस सिस्टम डैमेज होने का खतरा ज्यादा रहता है।

प्रो. एन के अग्रवाल के मुताबिक मधुमेह के रोगी को भावनात्मक प्रबंधन की बहुत जरूरत होती है। जिन लोगों में आनुवंशिक कारणों से यह रोग नहीं पाया गया उनमें जंक फूड, अनियंत्रित भोजन के सेवन व रूटीन अनियमितता से इसका खतरा बढ़ रहा है। 

डायबिटिज टाइप 1.5 पर बेस्ट पेपर प्रजेंटेशन का सम्मान पा चुके डॉ अभिषेक पांडेय के मुताबिक  मधुमेह के इलाज के तीन स्तंभ हैं डाइट, एक्सरसाइज और मेडिसिन। इसका पालन आपको मधुमेह के खतरे से बचाएगा। 

Posted By: Abhishek Sharma

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