रोपवे पर बैठकर कैसा दिखता है अपना बनारस? आइए ले चलते हैं आपको हवाई सफर पर
वाराणसी में भारत का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे जल्द शुरू होने वाला है, जो ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाएगा। यह ...और पढ़ें
HighLights
भारत का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे जल्द होगा शुरू।
ट्रैफिक जाम से मुक्ति, 15 मिनट में पूरा होगा सफर।
हवाई दृश्य का अनुभव, काशी विश्वनाथ तक आसान पहुंच।
जागरण संवाददाता, वाराणसी: 'रोपवे पर बैठकर कैसा दिखता है अपना बनारस? आइए ले चलते हैं आपको हवाई सफर पर।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ट्रैफिक जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए तैयार हो रहा अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे अब अपने अंतिम चरणों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 807 करोड़ रुपये से बना यह प्रोजेक्ट अब जल्द ही शुरू होने की ओर है। उम्मीद यह भी है कि विधानसभा चुनाव की अधिसूचना के पहले इसे चालू भी किया जा सकता है।
भारत का पहला और दुनिया का तीसरा पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट काशी वासियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। हाल ही में, चक्रवाती तूफान अर्णब के असर और बादलों के बीच दैनिक जागरण की टीम ने इस महत्वकांक्षी परियोजना के गोंडोला (ट्रॉली) पर सवार होकर रोमांचक सफर तय किया और इसके जमीनी व हवाई अनुभव को साझा किया।

हवा में तैरता अहसास और शहर का विहंगम दृश्य
जब आप वाराणसी कैंट स्टेशन के पास से रोपवे के गोंडोला में सवार होते हैं, तो कुछ ही पलों में आप जमीन से करीब सौ फीट की ऊंचाई पर हवा में होते हैं। इस आधुनिक केबल कार प्रणाली के गोंडोला को चारों तरफ से ट्रांसपेरेंट (पारदर्शी) बनाया गया है, ताकि यात्री ऊपर से ही पूरे शहर के अनूठे दृश्यों का आनंद ले सकें। नीचे झांकने पर मकानों की छतें, व्यस्त सड़कें, ऐतिहासिक इमारतें, काशी विद्यापीठ और सिगरा स्टेडियम का विहंगम नजारा साफ दिखाई देता है। हवा में उड़ते हुए बनारस को देखना एक बेहद रोमांचक और अलौकिक अनुभव है। गिरजाघर के पास पहुंचते ही बाबा दरबार सहित अन्य प्रमुख मंदिर और उनके शिखर आपको नजर आएंगे।

जाम से मुक्ति और समय की बड़ी बचत
वाराणसी के सबसे व्यस्त और संकरे माने जाने वाले रास्तों—कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया चौराहे—के बीच रोजाना लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को बचाने के लिए इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार की गई है।
सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में जहां पीक आवर्स में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लग जाता था, वहीं अब इस हवाई मार्ग के जरिए यह सफर केवल 15 से 16 मिनट में पूरा हो जाएगा। इस ड्रीम प्रोजेक्ट की आधारशिला मार्च 2023 में रखी गई थी, जिस पर लगभग ₹645 करोड़ की लागत आई है। हाल ही में इस आधुनिक परियोजना के दूसरे चरण का ट्रायल रन सिगरा स्थित काशी विद्यापीठ स्टेशन पर सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, जिससे इसकी शुरुआत की उम्मीदें और प्रबल हो गई हैं।
5 आधुनिक स्टेशन और सुगम रूट इस पूरे प्रोजेक्ट के पहले चरण में कुल 5 अत्याधुनिक स्टेशन बनाए गए हैं, जो प्रमुख बिंदुओं को आपस में जोड़ते हैं:
वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन (Varanasi Cantt)
काशी विद्यापीठ (Kashi Vidyapith)
रथयात्रा (Rathyatra)
गिरजाघर (Girjaaghar)
गोदौलिया (Godowlia)

किराया, स्मार्ट कार्ड और विश्वनाथ दर्शन की आसानी
यात्रियों की जेब और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसका किराया बेहद किफायती रखा गया है। विभिन्न स्टेशनों के बीच यात्रा का किराया ₹10 से ₹50 के बीच निर्धारित किया गया है, जिसमें कैंट से गोदौलिया अंतिम स्टेशन तक का पूरा सफर ₹50 में तय होगा। मेट्रो की तर्ज पर यात्रियों को स्मार्ट कार्ड की सुविधा भी मिलेगी, जिसके जरिए टिकट खरीदने पर 20% तक की छूट का प्रावधान किया गया है।
इस प्रणाली में लगभग 148 से 220 ट्रॉलियां (गंडोला) संचालित होंगी, और प्रत्येक ट्रॉली में एक बार में 10 यात्री बैठकर सफर कर सकेंगे। सुरक्षा के लिहाज से यह पूरी तरह आधुनिक मोनो-केबल डिटेचेबल तकनीक से लैस है। सफर पूरा होने के बाद जब यात्री गोदौलिया चौराहे पर उतरेंगे, तो वहां से बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर और मां गंगा के पवित्र दशाश्वमेध घाट की दूरी बहुत कम रह जाएगी। इससे बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए धार्मिक दर्शन और पर्यटन करना अत्यधिक सुविधाजनक और आरामदायक हो जाएगा।
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