वाराणसी, जेएनएन। मौसम का रुख इन दिनों मानो दिसंबर सरीखा हो गया है। सर्दियां अब गुलाबी ठंड से आगे बढ़ गई हैं। चार दिनों से बादलों की सक्रियता आ आलम एेसा है कि बादल बुधवार की सुबह भी अपनी जगह काबिज नजर आए। हल्‍का कोहरा और ओस के मेल का ऐसा खेल हुआ कि पारा सीजन में पहली बार बीस डिग्री से कम होकर 19 डिग्री पर पहुंच गया। वहीं अधिकतम तापमान भी ठंड के सीजन में कुछ दिनों से तीस डिग्री से कम बना हुआ है। सुबह बदली और कोहरे का मेल होने से हवाएं भी ठंड से सिहरन पैदा करती रहीं हाला‍ंकि दिन चढ़ने के साथ ही सूरज की रोशनी तो नहीं नजर आई मगर ठंडी हवाओं से निजात भी मिली।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार बंगाल की खाड़ी से पर्याप्‍त नमी मिलने और पुरवा हवा का रुख होने से पूर्वांचल में बादलों की सक्रियता बनी हुई है। वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्‍तराखंड के पहाड़ों पर रह रहकर हो रही बर्फबारी से भी ठंड में इजाफा आगे होने की उम्‍मीद है। वहीं आने वाले दो से चार दिनों तक बादलों की अावाजाही बनी रह सकती है। हालांकि तेज बरसात की आशंका कम है। जबकि इस पखवारे उम्‍मीदों के मुताबिक न्यूनतम और अधिकतम पारा क्रमश: बीस और तीस डिग्री से कम हो चुका है। मौसम का यही रुख बना रहा तो अब अगले सप्‍ताह न्‍यूनतम पारा 15 डिग्री के करीब भी पहुंच सकता है। 

बीते चौबीस घंटों में अधिकतम तापमान 24.4 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्‍य से तीन डिग्री कम था। वहीं न्‍यूनतम तापमान 19.1 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्‍य से एक डिग्री कम था। वहीं आर्द्रता इस दौरान अधिकतम 80 और न्‍यूनतम 67 फीसद दर्ज की गई। मौसम विभाग की ओर से जारी सैटेलाइट तस्‍वीरों में पूर्वांचल में बादलों की सक्रियता बनी हुई है। पर्याप्‍त नमी वातावरण से मिली तो बूंदाबांदी भी हो सकती है। 

वहीं कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह मौसम फसलों के लिए चिंता का विषय है, बादलों की सक्रियता की वजह से तैयार को रही फसलों में कीटों का प्रकोप भी हो सकता है। ऐसे में खेतों में निगरानी रखने की जरूरत है। कोहरा बनने लगा है हालांकि यह सघन नहीं है ऐसे में सब्जियों का उत्‍पादन बेहतर हो सकता है। हालांकि बारिश होने के बाद धान का उत्‍पादन प्रभावित हो सकता है।

Posted By: Abhishek Sharma

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