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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 25, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Varanasi News: दुर्गम क्षेत्रों में ड्रोन से दवा और स्वास्थ्य रिपोर्ट पहुंचाने की राह अब होगी सुगम, IIT BHU ने किया कमाल

By SHAILESH KUMAR ASTHANAEdited By: Vivek Shukla
Published: Wed, 25 Jun 2025 12:54 PM (IST)Updated: Wed, 25 Jun 2025 12:59 PM (IST)

आइ इंटीग्रेटेड ड्युअल डिग्री प्रोग्राम (बीटेक, एमटेक इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग) की छात्रा श्रुति तुलसीदास अव्हाड़ व पीएचडी छात्रा शिल्पी ...और पढ़ें

बाएं से ड्रोन पर कार्य कर रहीं शोध छात्रा शिल्पी कुमारी, शोध प्रस्तुति को थाइलैंड पहुंचीं श्रुति तुलसीदास व IIT के सहायक प्रो. डा. अजय प्रताप। जागरण

बाएं से ड्रोन पर कार्य कर रहीं शोध छात्रा शिल्पी कुमारी, शोध प्रस्तुति को थाइलैंड पहुंचीं श्रुति तुलसीदास व IIT के सहायक प्रो. डा. अजय प्रताप। जागरण 

HighLights

  1. IIT की शोध परियोजना को यूनेस्को ने सराहा, ग्लोबल फोरम में प्रस्तुति के लिए चयनित 

  2. इंडिया AI स्टूडेंट फेलोशिप प्रोग्राम के तहत आइआइटी बीएचयू में चल रहा काम

शैलेश अस्थाना, जागरण, वाराणसी। ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी, युद्ध और कृषि कार्यों में ही नहीं बल्कि आपदा पीड़ित मानवता की सेवा के लिए भी कार्य करेंगे। नैतिक क्षेत्रों में भूमिका निभाने वाले ये ड्रोन किसी बाढ़ग्रस्त, भूस्खलित क्षेत्र में सुरंग में फंसे लोगों का न सिर्फ पता लगा सकेंगे बल्कि उनके स्वास्थ्य की जांच कर उसकी रिपोर्ट भी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक भेज सकेंगे। उसके आधार पर चिकित्सक द्वारा दी गई दवा की आपूर्ति भी करने की जिम्मेदारी उठाएंगे।

भविष्य के इन नैतिक ड्रोंस पर आइआइटी बीएचयू के विज्ञानी काम कर रहे हैं। उनकी इस शोध परियोजना को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर थाईलैंड में आयोजित यूनेस्को ग्लोबल फोरम में प्रस्तुति के लिए चुना गया है। शोध परियोजना पर कार्य कर रहीं एमटेक की छात्रा श्रुति तुलसीदास अव्हाड़ इसके लिए थाइलैंड पहुंच चुकी हैं, उन्होंने इसे मंगलवार को फोरम में प्रस्तुत भी किया।

एआइ इंटीग्रेटेड ड्युअल डिग्री प्रोग्राम (बीटेक, एमटेक इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग) की छात्रा श्रुति तुलसीदास अव्हाड़ व पीएचडी छात्रा शिल्पी कमारी इन ड्रोन पर आइआइटी बीएचयू के कंप्यूटर विज्ञान इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. अजय प्रताप की देखरेख में काम कर रही हैं।

इस संबंध में डा. अजय प्रताप ने बताया कि इस शोध परियोजना पर काम करने के लिए केंद्र सरकार की पहल इंडिया एआइ स्टूडेंट फेलोशिप प्रोग्राम से अनुदान प्राप्त हुआ है। इस परियोजना के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए एक बुद्धिमान यूएवी प्रणाली के एक वैचारिक माडल पर काम किया जा रहा है। यह ड्रोन आपदाग्रस्त दुर्गम क्षेत्रों में जाएगा, इसमें सेंसर लगे होंगे, जिनसे वह वहां मानव उपस्थिति का पता लगा सकेगा और उनकी संख्या भी गिन सकेगा।

ड्रोन उस क्षेत्र में कलाई में बांधे जाने योग्य कुछ फीते नीचे गिराएगा, जिन्हें वहां फंसे लोग अपनी कलाई पर बांध लेंगे तो वह उन सबकी अलग-अलग बीपी, ईसीजी, पल्स रेट, ब्रेन स्ट्रेस, शरीर का तापमान, श्वसन गति आदि की माप कर आंकड़ों को फाग कैंपेनिंग के माध्यम से ट्रेन सिस्टम जैसे क्लाउड आदि के माध्यम से निकटवर्ती अस्पताल को भेज देगा।

वहां अस्पताल में लगे सर्वर के माध्यम से डिवाइस पर आंकड़े दिखने लगेंगे। इन्हें देख चिकित्सक प्रत्येक फंसे व्यक्ति के अनुसार दवाओं की सलाह दे सकेंगे और उन दवाओं को पुन: ड्रोन के माध्यम से संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकेगा।

डा. अजय प्रताप ने बताया कि इस ड्रोन के तैयार हो जाने के बाद दुर्गम ग्रामीण या पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यंत वृद्ध, कमजोर, बीमार व्यक्ति को भी मेडिकल सुविधा मुहैया कराई जा सकेगी और उन्हें बार-बार अस्पताल ले जाने-ले आने की प्रक्रिया से राहत मिल सकेगी। यह ड्रोन भारत सरकार के रिमोट हेल्थ मानीटरिंग कार्यक्रम में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। इनका प्रोटोटाइप तैयार कर लिया गया है और पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया गया है।