वाराणसी, जागरण संवाददाता। आंध्र प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि सब्जी के खेती को बढ़ावा देकर वहां के किसानों की आय में बढ़ोत्तरी की जा सकती है। आन्ध्र प्रदेश की मुख्य फसल चावल, कपास, ज्वार, बाजरा आदि है। किसानों की आमदनी एवं पोषण सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सब्जी की खेती को बढ़ावा आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में शनिवार को आन्ध्र प्रदेश के राज्य बीज विकास निगम के उपाध्यक्ष एवं प्रबंधक निदेशक डा.. शेखर बाबू गेददम ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी का दौरा किया।

यहां पर चल रहे शोध कार्यों एवं बीजों के बारे में जानकारी ली। संस्थान के निदेशक डा. टीके बेहेरा व डा. गेददम के बीच आपसी सहयोग को लेकर गहन चर्चा हुई। मुख्य रूप से टमाटर, भिण्डी, बैंगन, लोबिया, करेला, खीरा, कुम्हड़ा, लौकी, शिमला मिर्च एवं पत्तागोभी फसलों के विभिन्न प्रजातियों के उस क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर खेती करने की सहमति बनी। इसके आलावा संस्थान द्रारा किचेन गार्डेन हेतु जिसमें 10 प्रकार की सब्जियां होगी। इस पैकेट की पाइलट स्केल पर छोटे किसानों को आन्ध्र प्रदेश सरकार द्रारा दिया जायेगा। इस अवसर पर सब्जी उन्नयह विभाग के अध्यक्ष डा. पीएम सिंह के साथ डा. सुधाकर पाण्डेय, डं. नीरज सिंह, डा. राजेश कुमार आदि मौजूद थे।

इससे पहले तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आज समापन हुआ। इस सम्मेलन में कुल दस तकनीकी सत्रों में तीस आमंत्रित व्याख्यान एवं तीन स्मृति व्याख्यान आयोजित हुए। इस सम्मेलन में दस देशों के लगभग 700 प्रतिनिधियों ने भौतिक एवं वर्चुअल रूप से भाग लिया। सब्जियों के क्षेत्र में शोध कार्य को बढ़ावा देने हेतु एवं सब्जी उत्पादकता और उसकी उपलब्धता में वृद्धि के लिये इस सम्मेलन में विभिन्न विषयों से सम्बन्धित जैसे- कृषि में आर्टिफिशयल इन्टेलेजेन्स एवं ड्रोन तकनीकी का प्रयोग, जैविक खेती, किसान उत्पादक संगठनों का निर्माण, निजी एवं सहकारी क्षेत्रों द्वारा उद्यामिता, पोषण एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु संस्तुतियाँ की गयी। किसानों की आय बढ़ाने के लिये उपभोक्ता केन्द्रीत एवं बाजार उन्मुख सब्जियों के किस्मों का विकास हेतु सरकारी एवं निजी संगठनों को एक साथ मिलकर काम करने पर बल दिया गया। युवाओं में कृषि के प्रति आकर्षण हेतु विश्वविद्यालय में औद्योगिक संस्थानों द्वारा छात्रों को पढ़ाई के लिये छात्रवृत्ति के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाये। सब्जियों की खेती में कीट एवं रोगनाशी रसायनों के प्रयोग में कमी लाने की अनुशंसा की गयी जिससे अवशेषी रसायनों के संचयन में कमी आये एवं निर्यात के मापदण्डों को पूरा कर सके।

नौ सत्रों में प्रस्तुत किये गये शोध पत्रों में से प्रत्येक सत्र के तीन श्रेष्ठ शोध पत्रों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। आज के समापन सत्र की अध्यक्षता डा. कीर्ति सिंह, पूर्व अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक चयन मण्डल ने किया। अपने उद्बोधन ने डा. सिंह ने संस्थान में हो रहे शोध कार्यों की सराहना करते हुये सम्मेलन की संस्तुतियों को मूर्तिरूप देने की अनुशंसा की। आज के कार्यक्रम में चयनित किसान भी शामिल हुए जिनको प्राकृतिक खेती के प्रथम शिखर सम्मेलन, आनन्द, गुजरात के सजीव प्रसारण में केन्द्रीय कृषि मंत्री, गृह एवं सहकारिता मंत्री, राज्यपाल, गुजरात एवं माननीय प्रधानमंत्री  का प्राकृतिक खेती के लिए दिये गये सुझाव एवं लाभ को सुनाया गया। सजीव प्रसारण में माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने बताया कि एक गाय के गोबर एवं मूत्र से 30 एकड़ में कृषि उत्पादन बिना रसायनिक उर्वरक किया जा रहा है।

Edited By: Saurabh Chakravarty