वाराणसी, इंटरनेट डेस्‍क। बनारस शहर की कई खबरों ने रविवार यानी 22 मई को चर्चा बटोरी जिनमें ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण में सोमवार को होगी सुनवाई, वाराणसी से पशुपतिनाथ धाम काठमांडू की उड़ान, वाराणसी ईएसआइसी अस्पताल को मिला आइएसओ प्रमाण पत्र, निधि ने मरणोपरांत अंग दान कर समाज को दिया संदेश आदि प्रमुख खबरें रहीं। जानिए शाम 7 बजे तक की शहर-ए-बनारस की पांच प्रमुख और चर्चित खबरें।

ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण में सोमवार को होगी सुनवाई, जिला जज की अदालत में सुनवाई का सुप्रीम कोर्ट ने दिया है आदेश

ज्ञानवापी परिसर में स्थित मां श्रृंगार गौरी के दैनिक पूजा-अर्चना की इजाजत देने और अन्य देवी-देवताओं को संरक्षित करने को लेकर दायर वाद की सोमवार को जिला जज डा. अजय कृष्ण विश्वेस की अदालत में सुनवाई होगी। जिला जज की अदालत में नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 7 नियम 11 के तहत के वाद की पोषणीयता पर पहले सुनवाई होगी।

काशी विश्वनाथ धाम वाराणसी से पशुपतिनाथ धाम काठमांडू की उड़ान, सोमवार और शुक्रवार को विमान सेवा का संचालन

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी से काठमांडू के पशुपतिनाथ धाम जाने में अब पर्यटकों को काफी आसानी होगी। उक्त बातें बुद्धा एयर के कंट्री हेड उद्धव सुबेदी ने नदेसर के एक होटल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने बताया कि यह विमान सेवा सप्ताह में दो दिन उपलब्ध रहेगी। इस रूट पर विमान सेवा प्रारंभ किये जाने से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों में खुशी का महौल है।

वर्ष 2018 में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विमान सेवा को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया था लेकिन बाद में कोरोना के फैलते संक्रमण को रोकने के लिये मार्च 2020 में सभी अंतरराष्ट्रीय विमानों पर रोक लगा दिया गया। ऐसे में वाराणसी-काठमांडू के बीच भी विमान सेवा बंद कर दी गयी। अब अंतरराष्ट्रीय विमानों पर प्रतिबंध हटा दिये जाने पर दो वर्ष बाद इस रूट पर फिर से विमान सेवा प्रारंभ की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर पक्ष के मुकदमे की योग्यता पर सवाल उठाने वाली मस्जिद पक्ष की दाखिल अर्जी पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने का जिला जज को आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को उक्त प्रकरण में सुनवाई करते हुए मामले की जटिलता और संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी सुनवाई सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत से जिला जज को स्थानांतरित कर दिया था।

वाराणसी ईएसआइसी अस्पताल को मिला आइएसओ प्रमाण पत्र, हर माह आते हैं 20 हजार से अधिक मरीज

पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने ईएसआइसी अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक का लोकार्पण किया था। वहीं 150 बेड के इस अस्पताल की ओपीडी में हर माह 20 हजार से अधिक मरीज आ रहे हैं। अब इसको आइएसओ का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांडेयपुर स्थित जिस ईएसआइसी (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) के अस्पताल का लोकार्पण किया था, उसे आइएसओ प्रमाण पत्र मिल गया है। यह प्रमाण पत्र 2025 तक के लिए मिला है। इस बीच एक टीम आकर यहां की सुविधाओं का फिर से मूल्यांकन करेगी। यह अस्पताल पूर्वांचल का एकमात्र ईएसआइसी का अस्प्ताल है।

यहां वाराणसी के साथ ही गाजीपुर, मीरजापुर, चंदौली, भदोही, सोनभद्र, जौनपुर, बलिया, मऊ, आजगढ़ के साथ ही गोरखपुर के भी बीमित कर्मचारियों का यहां पर उपचार हाेता है। पहले यह अस्पताल खंडहर के रूप में राज्य सरकार के अधीन था। 2016 में इसे केंद्र सरकार ने अपनी अधीन ले लिया और आज 150 बेड का आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्प्ताल बन गया है। पहले जहां एक माह में कुछ 500 से भी कम मरीज आते थे वहीं अब एक माह में 20 हजार से अधिक मरीज आ रहे हैं।

वाराणसी की निधि ने मरणोपरांत अंग दान कर समाज को दिया संदेश, प्रधानमंत्री ने निधन पर व्यक्त की शोक संवेदना

काशी की बीस वर्षीय बेटी निधि श्रीवास्तव मर कर अमर हो गईं..। सिगरा, माधोपुर की रहने वाली निधि श्रीवास्तव परिवार की आर्थिक तंगी की वजह से गुजरात के जामनगर की एक फैक्ट्री में कार्य कर रही थीं। पिछले 14 मई को फैक्ट्री के लिए निकलीं, इसी बीच सड़क हादसे का शिकार हो गईं। सिर पर आई गंभीर चोट से अचेत निधि को आसपास के लोगों ने तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराकर परिवार के लोगों को सूचित किया। इस बीच घटना की जानकारी भाजपा के प्रदेश सहप्रभारी सुनील ओझा को मिली। तत्काल अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इलाज की व्यवस्था की गई लेकिन छह दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 19 मई को निधि ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

लेकिन मौत से पहले हृदय, लीवर, किडनी,आंख आदि अस्पताल को डोनेट कर दिया। घटना की जानकारी मिलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निधि श्रीवास्तव के निधन पर गहरा दुख प्रकट करते हुए अपनी शोक संवेदना व्यक्त की। भाजपा काशी क्षेत्र के मीडिया प्रभारी नवरतन राठी ने बताया कि 20 मई की देर रात निधि का पार्थिव शरीर अहमदाबाद से एंबुलेंस द्वारा घर लाया गया। वरिष्ठ भाजपा जनों ने उनके आवास पर जाकर अपनी शोक संवेदना व्यक्त की और शव यात्रा में शामिल हुए। वहीं नि‍धि के परिवार की ओर से इस बाबत जानकारी सामने आने के बाद यह प्रकरण भी खूब चर्चा में आ गया है।

24 मई को क्‍यों मनाते हैं वाराणसी शहर का जन्‍मदिन? इतिहास में दर्ज है इस सवाल का अनोखा जवाब

अकसर 'न आदि न अंत' की मान्‍यता वाले शहर काशी के जन्‍मदिन को लेकर लोगों के मन में सवाल भी उठते रहे हैं। मगर 24 मई को मनाए जाने वाले जन्‍मदिन का आधार पौराणिक कतई नहीं है। जी हां, 24 मई को वाराणसी शहर का जन्‍मदिन मनाए जाने की परंपरा अधिक पुरानी नहीं है। गजेटियर में दर्ज वाराणसी शहर का आधिकारिक नाम 24 मई 1956 को स्‍वीकारने की जानकारी सार्वजनिक की गई है।

इसके पूर्व वाराणसी जिले का नाम स्‍थाई नहीं था। कोई इसे बनारस तो कोई काशी कहा करता था। मगर वरुणा और असि नदियों के नाम को साझा कर वाराणसी का नाम 24 मई को आधिकारिक करने की वजह से ही इस दिन वाराणसी में सामाजिक संस्‍थाएं और लोग शहर का जन्‍म दिन अब मनाने लगे हैं। इस ऐतिहासिक तथ्‍य को सबसे पहले जागरण की ओर से ही सामने लाया गया था। उसके बाद से ही यह दिन अब काशी में परंपरा और उत्‍सव के रूप में मनाया जाने लगा है।

Edited By: Saurabh Chakravarty