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घूंघट से निकलकर अब राइफल थामेंगी गांव की महिलाएं, वाराणसी में खेल के मैदान में दिखाएंगी दमखम

By Ravi pandeyEdited By: Sachin Sharma
Published: Sun, 18 Oct 2026 12:49 PM (IST)

वाराणसी में होप वेलफेयर सोसाइटी की ग्रीन आर्मी 400 ग्रामीण महिलाओं को राइफल शूटिंग का प्रशिक्षण दे रही है।

रोहनिया के देउरा गांव के राइफल शूटिंग रेंज में अभ्यास करतीं ग्रीन आर्मी की महिलाएं

रोहनिया के देउरा गांव के राइफल शूटिंग रेंज में अभ्यास करतीं ग्रीन आर्मी की महिलाएं

HighLights

  1. वाराणसी में 400 ग्रामीण महिलाएं सीख रहीं राइफल शूटिंग।

  2. ग्रीन आर्मी महिला सशक्तिकरण और आत्मविश्वास बढ़ा रही है।

  3. सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय हैं ये सशक्त महिलाएं।

रवि पांडेय, वाराणसी। कभी घर की चौखट और घूंघट तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं अब राइफल थामकर निशाना साध रही हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ निशानेबाजी सीखना नहीं, बल्कि अपने भीतर आत्मविश्वास जगाना और गांव की दूसरी बेटियों के लिए नई राह खोलना है।

होप वेलफेयर सोसाइटी की ओर से गठित ग्रीन आर्मी ने महिला सशक्तीकरण की मुहिम को अब खेलों से जोड़ दिया है। रोहनिया के देउरा गांव स्थित राइफल शूटिंग रेंज में करीब 400 महिलाएं निशानेबाजी सीख रही हैं। ग्रीन आर्मी के संस्थापक रवि मिश्रा के अनुसार, जल्द ही राइफल शूटिंग और तीरंदाजी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

इसमें ग्रीन आर्मी से जुड़ी महिलाओं के साथ ग्रामीण बच्चियां और युवतियां भी हिस्सा ले सकेंगी। निशानेबाजी सीख रहीं 10 महिलाओं को लंका स्थित शूटिंग रेंज में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले सकें। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं आगे अपने गांवों में प्रशिक्षक की भूमिका निभाएंगी।
पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही ग्रीन आर्मी।

नशामुक्ति से पर्यावरण तक, 270 गांवों में सक्रियता

ग्रीन आर्मी की करीब 2600 महिलाएं 270 गांवों में विभिन्न सामाजिक अभियानों से जुड़ी हैं। नशामुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चलाने के साथ टीम बालिका शिक्षा, महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और पालीथिन मुक्ति के लिए काम करती है।

नशे के खिलाफ अभियान में महिलाओं का हाथ जोड़कर समझाने से लेकर जरूरत पड़ने पर लाठी के इस्तेमाल तक का तरीका चर्चा में रहा है। टीम की महिलाएं गंगा घाटों और मंदिरों से पुराने कपड़े एकत्र कर उनसे झोले तैयार करती हैं और उनका वितरण करती हैं।

गांव में बेटी के जन्म पर पौधरोपण और सोहर गाकर उत्सव मनाया जाता है। बच्चों के जन्म के बाद दो वर्ष तक उनके टीकाकरण पर भी ध्यान दिया जाता है। इन प्रयासों के जरिए ग्रीन आर्मी सामाजिक कुरीतियों से मुकाबले के साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में जुटी है।

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