वाराणसी, जागरण संवाददाता: सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी से लगातार बिजली विभाग में हादसे हो रहे हैं और असमय बिजली कर्मी काल-कवलित हो रहे हैं। यह तब हो रहा है जब बिजली विभाग में अधिकांश व्यवस्थाएं रिमोट आधारित हो रही हैं। घटनाओं का ग्राफ देखें तो एक साल के भीतर वाराणसी जोन के चार जिलों में 73 बिजली दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें अकेले बनारस में पांच मौतें हुई हैं। जांच के दौरान अधिकांश घटनाओं में सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी ही सामने आई है।

इन उपकरणों की सख्त जरूरत लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह

हर उपकेंद्रों पर अर्थ चेन, सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट, गमबूट, डिस्चार्ज राड, पिलास, हैंड ग्लब्स की जरूरत है लेकिन अधिकांश जगहों पर सिर्फ सेफ्टी बेल्ट और हेलमेट ही उपलब्ध है। गमबूट मात्र एक से दो ही मिलेंगे। 

विद्युत मजदूर पंचायत के मंडल मंत्री अंकुर पांडेय बताते हैं कि अर्थ चेन और डिस्चार्ज रोड संरक्षा के लिए सबसे जरूरी उपकरण है लेकिन इनकी उपलब्धता बिजली प्रशासन नहीं करा पा रहा है जिससे दुर्घटनाएं हो रही हैं। 

विद्युत मजदूर संगठन के वेद प्रकाश राय कहते हैं कि संरक्षा के साथ खिलवाड़ करने से जनहानि के साथ ही विभाग का करोड़ों रुपया हर साल मुआवजे में जाता है। हालांकि विभागीय अधिकारी पीड़ितों को पैसा देने में नियमों का हवाला देकर उसे लटकाना चाहते हैं। संगठन इस मसले को लगातार उठा रहा है ताकि दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।

Edited By: Shivam Yadav

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट