काशी की बेटियां बनीं आत्मनिर्भर, मार्शल आर्ट्स सीखकर खुद संभाल रहीं 'मास्टर' की कमान
काशी में रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत हजारों बेटियां मार्शल आर्ट्स सीखकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। ये बालिकाएं ...और पढ़ें
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HighLights
रानी लक्ष्मीबाई कार्यक्रम से 4,500 से अधिक बेटियां प्रशिक्षित हुईं।
ब्लैक बेल्ट धारक बेटियां अब खुद प्रशिक्षक बनकर रोजगार पा रही हैं।
आत्मरक्षा के साथ कानूनी अधिकारों की जानकारी भी दी जा रही है।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। अब काशी की गलियों और स्कूलों में सिर्फ किताबी ज्ञान की गूंज नहीं है, बल्कि वहां गूंजती है बेटियों की मजबूत दहाड़—हैया! प्रदेश सरकार के रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत लगभग 4,500 बालिकाएं आज खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से फौलादी बना रही हैं।
खास बात यह है कि इस मुहिम में कल तक जो बेटियां खुद सीखने आती थीं, आज वे ब्लैक बेल्ट हासिल कर खुद मास्टर (प्रशिक्षक) की भूमिका निभा रही हैं और आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बन रही हैं। मानव अकादमी की सचिव एवं वरिष्ठ कराटे प्रशिक्षक ज्योति सिंह कहती हैं कि संस्था से प्रशिक्षण लेकर अब तक 50 से ज्यादा बालिकाएं ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुकी हैं, इनमें से 32 बेटियां आज विभिन्न विद्यालयों में कराटे सिखाकर खुद का रोजगार चला रही हैं।
कई भारतीय सेना, आइटीबीपी, सीआरपीएफ और सीआइएसएफ जैसे प्रतिष्ठित सुरक्षा बलों में देश की सेवा कर रही हैं। वर्ष 2006 से शुरू हुई यह यात्रा आज प्रदेश के 12 जिलों समेत देश के नौ राज्यों तक फैल चुकी है, जिसके जरिए अब तक तीन लाख से अधिक बालिकाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए जा चुके हैं।
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशिक्षक ज्योति सिंह के मार्गदर्शन में किया जा रहा है, उनके साथ सीमा गुप्ता, खुशबू मौर्या, साक्षी तिवारी, साबरीन हाशमी, कृतिका, खुशी कुमारी, स्नेहलता सिंह, अंजलि प्रजापति, प्रीति मौर्या एवं ममता सोनकर प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं।
सिर्फ किक-पंच नहीं, कानूनी अधिकारों का भी पाठ
शिविरों में बालिकाओं को सिर्फ किक, पंच और ब्लॉक जैसी कराटे तकनीकें ही नहीं सिखाई जा रही हैं, बल्कि उन्हें विषम और अचानक आने वाली आपात स्थितियों से निडर होकर निपटना भी सिखाया जा रहा है। कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया जाता है ताकि वे समाज में हर चुनौती का डटकर मुकाबला कर सकें। ज्योति का कहना है कि उद्देश्य सिर्फ खिलाड़ियों को तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसी बेटियां बनाना है जो अपने जीवन में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
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