वाराणसी [प्रमोद यादव]। भारतीय समाज के लिए उत्सवों का सबसे समृद्ध मास कार्तिक बनारस में सबसे खास हो जाता है। यह महीना सात वार नौ त्योहार की मान्यता वाले नगर के मिजाज से तो मेल खाता ही है पर्व उत्सवों का रंग और भी चटक हो जाता है। शरद पूर्णिमा से ही गंगा के घाटों पर निखर आई श्रद्धा-आस्था की कतार के बाद अब ज्योति पुकार गंगा के समानांतर बहने के इंतजार में है। इस अहसास का देश-विदेश तक प्रसार कर  पर्यटन विस्तार के मिशन को धार देने के लिए यूपी टूरिज्म ने अपनी वेबसाइट से इसके तार जोड़ दिए हैैं। इसमें बनारस के अनूठे जल उत्सव देव दीपावली के साथ ही गंगा महोत्सव, नाग नथैया लीला समेत विभिन्न आयोजनों को शीर्ष स्थान दिया है। 

दिव्य कार्तिक मास पर्यंत (शिव) की नगरी में हरि (विष्णु) के नाम अनुष्ठान विधान किसी का भी ध्यान खींच लेते हैैं। सुबह गंगा में डुबकी और काशी पुराधिपति से भी पहले दंड प्रणाम पंचगंगा घाट के उपर विराजमान बिंदु माधव के नाम होता है। इस घाट की मान्यता पंचनद तीर्थ की है जहां गंगा, यमुना, विशाखा, धूतपापा व किरणा नदियों का संगम होता है। माना जाता है कि यहां स्वयं तीर्थराज प्रयाग भी कार्तिक मास में स्नान करने आते हैैं।

कार्तिक के पहले दिन से ही घाटों पर देव पितरों और अमर शहीदों की स्वर्ग राह आलोकित करने को आकाशदीप टिमटाने लगे हैैं। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर करवा चौथ के साथ चेतगंज की नक्कटैया का उत्सव मनाने के बाद काशी पांच दिवसीय ज्योति पर्व श्रृंखला मनाने के मूड में आने लगी है। द्वादशी को गोवत्स द्वादशी के मान के तहत बछड़े पूजे जाएंगे। त्रयोदशी को शुभ-समृद्धि की कामना संग धनतेरस मनाएंगे। आरोग्य के देवता प्रभु धनवंतरि के शायद देश में अकेले मंदिर के पट खुलेंगे और विषपायी की नगरी में छलक पड़ेगा अमृत कलश।

वर्ष में सिर्फ चार दिन के लिए अन्नपूर्णेश्वरी के भी पट खुल जाएंगे और मइया बांटेंगी अन्न धन का खजाना। नरक चतुर्दशी को हनुमान जयंती के साथ नरक चतुर्दशी मनाई जाएगा और अमावस्या की रात अंधेरे पर उजाले की विजय का पर्व दीपावली का रंग निखर आएगा। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की शोभायात्रा और देवालयों में अन्नकूट की झांकी नयनों में समाएगी। द्वितीया को भैयादूज और चित्रगुप्त उत्सव तो षष्ठी पर चार दिनों तक सरोवर-नदियों तक लोक रंग छाएगा।

गोपाष्टमी पर गो पूजन और अक्षय नवमी पर आंवले के वृक्ष के नीचे पंगतें जमेंगी। शुक्ल पक्ष के 11वें दिन हरि प्रबोधिनी एकादशी पर जागेंगे प्रभु और तुलसी विवाह की झांकी सज जाएगी। इसके साथ घाट पर गंगा महोत्सव के नाम से सुर गंगा बहती नजर आएगी जो बैकुंठ चतुर्दशी पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का स्थापना दिवस मनाते हुए नगर के सबसे बड़े पर्व का रूप लेती देवदीपावली उत्सव तक जाएगी। इसके साथ ही नवरात्र से शुरू उत्सवों का सिलसिला थमेगा। 

Posted By: Abhishek Sharma

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