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काशी में चंपत राय को संतों ने दिया क्लीन चिट, कहा - 'चंपत राय पर अखंड विश्वास था, है और अंतिम सांस तक रहेगा'

By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 03 Nov 2026 11:51 AM (IST)

अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने चंपत राय के श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में योगदान की सराहना ...और पढ़ें

काशी में संतों ने चंपत राय को दी क्लीन चिट, राम मंदिर आंदोलन में योगदान पर जताया अखंड विश्वास।

काशी में संतों ने चंपत राय को दी क्लीन चिट, राम मंदिर आंदोलन में योगदान पर जताया अखंड विश्वास।

HighLights

  1. स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने चंपत राय का समर्थन किया।

  2. राम जन्मभूमि आंदोलन में चंपत राय का योगदान अविस्मरणीय।

  3. राम मंदिर निर्माण विरोधियों पर स्वामी जी ने साधा निशाना।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में चंपत राय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि चंपत राय जी पर उनका अखंड विश्वास पहले भी था, आज भी है और अंतिम सांस तक बना रहेगा। राम जन्मभूमि के मुकदमे को 35 वर्षों तक अपने सीने में संजोकर रखने और इस संघर्ष को पूरी निष्ठा के साथ जीने वाले चंपत राय का योगदान अविस्मरणीय है।

उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि के लिए 492 वर्षों तक चले संघर्ष के बाद आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है और मंदिर पर धर्मध्वजा भी फहरा चुकी है। उन्होंने अपने पूज्य गुरुदेव जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर को याद करते हुए कहा कि वे एकांत में पूछा करते थे कि क्या राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण उनकी आंखों के सामने हो पाएगा? आज उनका सपना साकार हो चुका है।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में हुए राम मंदिर के भूमि पूजन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस ऐतिहासिक अवसर पर देश के शीर्ष संतों, विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधियों और प्रधानमंत्री की उपस्थिति में मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। वहीं, दूसरी ओर संसद के बाहर कुछ सांसदों ने काले कपड़े पहनकर भूमि पूजन का विरोध किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए सहयोग करने के बजाय अपने कार्यकर्ताओं को चंदा नहीं देने के निर्देश दिए थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी के लोगों पर भी राम मंदिर के लिए चंदा नहीं देने की बात कहने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने पहले मंदिर निर्माण के लिए सहयोग का विरोध किया, वे आज अपने योगदान के दावे किस आधार पर कर रहे हैं?

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि चंपत राय जी को बदनाम करने और उनके संघर्ष पर लांछन लगाने के प्रयास किए गए, लेकिन इन प्रयासों से उनका योगदान कम नहीं हो सकता। कोई बादल सूर्य को ढक नहीं सकता। तमाम आरोपों और विरोधों के बावजूद चंपत राय का संघर्ष और समर्पण आज और अधिक मजबूती के साथ सबके सामने है।

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