वाराणसी, जेएनएन। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रिव्‍यू पिटीशन को लेकर काशी में भी संतों में चर्चा शुरू हो गई है। काशी में भी लोगाें में अयोध्‍या प्रकरण को लेकर एक बार फ‍िर सियासी चर्चा गर्म हो गई है। मुस्लिम महिला मंच की ओर से भी लॉ बोर्ड के रिव्‍यू पिटीशन को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने अयोध्या श्रीराम जन्म भूमि पर फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन की सोचने तक को गैर जिम्मेदाराना करार दिया है। उन्होंने कहा कि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने जिस तरह बैठक की और कहा कि हम रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे, इससे देश के सामने उन्होंने गैर जिम्मेदाराना चरित्र का परिचय दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले सभी ने कहा था कि हम इस फैसले को मानेंगे चाहे निर्णय जो हो, लेकिन हम एक बात जरुर पूछना चाहेंगे कि आप किसको धोखा दे रहे हैं। देश को, अपनी कौम को या हिंदू समाज को? आपके विश्वास और आस्थाओं के हिसाब से हिंदू समाज नहीं चलता है। यह देश चलता है संविधान से, शरिया से नहीं और अंग्रेजों के समय से ही हमारे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठित मूर्तियां जीवंत व्यक्ति का दर्जा प्राप्त हैं। 

दूसरी बात, आपका मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमाएत-ए-उलेमा-ए-हिंद ये दोनों सुप्रीम कोर्ट में पार्टी नहीं है। लिहाजा, यह ढोंग बंद करिए। कल को आप लौटेंगे और कहेंगे कि सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। वास्तव में ये सुप्रीम कोर्ट में पार्टी थे ही नहीं तो उन्हें खारिज कौन करेगा। सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और इकबाल अंसारी ये दोनों पार्टी थे। इन दोनों ने कोर्ट के फैसले को माना है, हम उनका स्वागत करते हैं।

Posted By: Abhishek Sharma

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