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वाराणसी के अस्पतालों में ‘एनालिटिकल टेस्टिंग’ न होने से दो माह तक वितरित होती रहीं मानक में फेल दवाएं

By Shivam SinghEdited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 06 Oct 2026 07:25 PM (IST)

वाराणसी के अस्पतालों में एनालिटिकल टेस्टिंग लैब की सुविधा न होने के कारण दो महीने तक मरीजों को घटिया दवाएं ...और पढ़ें

वाराणसी में स्वास्थ्य सेवा पर सवाल: एनालिटिकल टेस्टिंग के अभाव में बांटी गईं घटिया दवाएं।

वाराणसी में स्वास्थ्य सेवा पर सवाल: एनालिटिकल टेस्टिंग के अभाव में बांटी गईं घटिया दवाएं।

HighLights

  1. वाराणसी अस्पतालों में एनालिटिकल टेस्टिंग लैब की सुविधा नहीं।

  2. दो माह तक मरीजों को वितरित होती रहीं घटिया दवाएं।

  3. एजिथ्रोमाइसिन के नमूने गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए।

शिवम सिंह, जागरण, वाराणसी। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिलास्तरीय अस्पतालों में एनालिटिकल टेस्टिंग (किसी सामग्री या उत्पाद की गुणवत्ता, शुद्धता, पहचान और संरचना का पता लगाना) के लिए लैब की सुविधा नहीं है। इससे समय-समय पर दवाओं की गुणवत्ता, शुद्धता और संरचना की जांच नहीं हो पाती। यही कारण है कि दो माह तक लगातार अस्पतालों में मानक में फेल दवाएं वितरित होती रही।

तीन सितंबर को जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने एजिथ्रोमाइसीन के चार नमूनों लिए थे, जिसमें तीन फेल निकला। वही तीन अगस्त को ड्रग वेयर हाउस लखनऊ से दवाएं मंगाई गई थी। हालांकि, अस्पताल अस्पताल पर ही जांच हो जाती तो लगातार दो माह तक खराब दवाएं न वितरित हो पाती। सरकारी अस्पतालों में ज्यादातर जेनेरिक दवाएं जेम पोर्टल, व स्थानीय स्तर पर खरीदारी की जाती हैं।

राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ‘एनालिटिकल टेस्टिंग’ सुविधा होने के नाते दिल की बीमारी, दौरे, डिप्रेशन और प्रसव के बाद खून बहने जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं के 10 बैच गुणवत्ता परीक्षण में फेल होने के बाद समय से वापस भेज दिए गए। पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के सीएमएस डा. एसपी मिश्र ने बताया कि गुणवत्ता और मरीज सुरक्षा प्रोटोकाल के मुताबिक ‘एनालिटिकल टेस्टिंग’ के लिए एनएबीएल लैब की सुविधा नहीं है। इसके लिए अभी ड्रग वेयर हाउस पर निर्भर रहना पड़ता है।

 

अस्पतालों में जेनेरिक दवाओं का व्यापक इस्तेमाल होता है। राज्य स्तर पर हर बैच की रैंडम टेस्टिंग और समस्याग्रस्त निर्माताओं पर सख्त निगरानी की जरूरत है। सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) नियमित रूप से दवाओं की सूची जारी करता है, लेकिन अस्पताल स्तर पर समय पर पकड़ न बनने से मरीजों का जोखिम बना रहता है। जेनेरिक दवाएं किफायती और जरूरी हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना सरकार और अस्पताल प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।

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संदीप चतुर्वेदी, मंत्री, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश।