वाराणसी, मुकेश चंद्र श्रीवास्तव। नवजात शिशु मृत्य दर में कमी लाने व मां-शिशु को एक साथ ही रखने की जीरो सेपरेशन पालिसी के लिए प्रदेश की पहली ब्लाक स्तरीय एमएनसीयू (मदर न्यूबार्न केयर यूनिट) वाराणसी के सेवापुरी में स्थापित होने जा रही है। इसमें छह बेड की यूनिट खोलने की सीएमओ कार्यालय की ओर से शनिवार को हरी झंडी भी मिल गई। अब इसके साथ ही वाराणसी के ही कबीरचौरा स्थित जिला महिला चिकित्सालय एवं दीनदयालय उपाध्यक्ष चिकित्सालय के एमसीएच विंग में भी एमएनसीयू की स्थापना करने की तैयार भी की गई है। ये दोनों यूनिट जिला स्तरीय होगी।

गुलाबी रंग में आकर्षक होगा एमएनसीयू वार्ड

एमएनसीयू वार्ड गुलाबी व अन्य रंगों से आकर्षित बनाया जाएगा। ताकि मां व शिशु को बेहतर वातावरण का अहसास हो। इस वार्ड को खोलने में सेल (कम्यूनिटी इंपावरमेंट लैब) संस्था तकनीकी सहयोग करेगी। यह संस्था डाक्टरों, नर्सों व अन्य स्टाफ को ट्रेनिंग देने के साथ ही वार्ड की डिजाइन भी तैयार करेगी। कम्युनिटी बिल्डंग एवं पार्टनरशिप कम्युनिटी इंपावरमेंटर लैब की निदेशक अग्रिमा आरती व अग्रिमा गायत्री ने शुक्रवार को सेवापुरी स्वास्क्य का दौरा किया। फिर एमएनसीयू स्थापित करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल से मार्ग दर्शन लिया। फिर शनिवार को अपर निदेशक/ सीएमओ डा. वीबी सिंह, एसीएमओ डा. एके मौर्या व डीपीएम संतोष से मुलाकात की।

बदायू में खुली है जिला स्तरीय पहली यूनिट

आरती ने बताया कि उनकी संस्था पिछले 18 वर्षों से निरंतर मां व शिशु की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल व नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए कार्य कर रही है। इसके संस्थापक डा. विश्वजीत कुमार ने सन 2003 में इस संस्था की शुरुआत की थी।

किया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन व उत्तर प्रदेश सरकार को मातृ एवं शिशु की बेहतर देखभाल के लिए तकनीकी व वैज्ञानिक सहयोग देती है। आरती ने बताया कि वैसे जिला स्तरीय एमएनसीयू सबसे पहले 23 सितंबर 2019 को बदायूं में व आठ मार्च 2021 को फतेहपुर में खोली गई है। इसके बाद जीला स्तरीय यूनिट खोलने की योजना वाराणसी में है। वहीं ब्लाक स्तरीय यूनिट वाराणसी में माडल के रूप में खुलेगी।

उदाहरण बनेगी प्रदेश का पहली ब्लाक स्तरीय यूनिट

सेवापुरी में स्थापित होने के बाद प्रदेश की पहली यूनिट एक उदाहरण बनेगी। आरती बताती हैं कि प्रदेश में नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने व मां- शिशु को एक साथ रखने की जीरो सेपरेशन पालिसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 17 अक्टूबर 2020 को दिशा -निर्देश जारी किया। इसके तहत सभी मातृ एवं शिशु चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात शिशु देखभाल से संबंधित सभी इकाइयों को आपस में जोड़कर एक इकाई के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका नाम एमएनसूयी दिया गया है।

कंगारू मदर केयर की कम ही शिशु मृत्यु दर

वर्तमान में प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में अब तक लगभग 174 केएमसी (कंगारू मदर केयर) लाउन्ज स्थापित किए जा चुके हैं। इसमें स्वयं व आस-पास के वातावरण की स्वच्छता रखते हुए सम्मानपूर्वक मां की खुली छाती से बच्चे की खुली छाती को त्वचा से त्वचा संपर्क की स्थिति में लम्बे समय तक रखना होता है। साथ ही समय-समय पर पूर्ण आहार के रूप में सिर्फ मां का दूध सही मात्रा में देना व समय- समय पर शिशु- मां के स्वास्थ का आंकलन किया जाता है। केएमसी के माध्यम से अभी तक लगभग 40 फीसद नवजात शिशु मृत्यु दर को कम किया जा चुका है। साथ ही अभी तक लगभग 1,98,116 नवजात शिशुओं को केएमसी प्रदान की जा चुकी है।

चार चरणों का होगा पालन

एमएनसीयू की स्थापना से उस चिकित्सालय में हो रही डिलीवरी लोड का आंकलन किया जाता है। इसके बाद बेड की संख्या की आवश्यकता का निर्धारण किया जाता है। बेड की आवश्यकता के आधार पर अस्पताल में उपलब्ध स्थान का चयन कर आवश्यक मरम्मत कार्य का आंकलन व अनुमानित लागत का निर्धारण किया जाता है। इसके बाद रणनीति बनाकर इसको अंतिम रूप दिया जाता है।

Edited By: Saurabh Chakravarty