आजमगढ़, जेएनएन। राजकीय मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन का उत्पादन 15 मई से शुरू करने को लेकर सरकार गंभीर है। कार्यदायी संस्था को निर्देश है कि अस्थाई ही ढांचा खड़ाकर मशीनाें को क्रियाशील करें। दरअसल, स्थाई भवन, स्लैब इत्यादि तैयार करने में वक्त लगने से रणनीति जमीन पर उतरना मुश्किल होगी। जबकि लोगों की जान बचाने के लिए आक्सीजन का उत्पादन होना महत्वपूर्ण है।

प्लांट के चबूतरे संग बनेगा अस्थाई भवन

राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं सुपर फैसिलिटी अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीज बड़ी संख्या मे भर्ती हैं। प्रशासन को वहां के लिए रोजाना करीब सात से आठ टन आक्सीजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इसे मैनेज करना जिम्मेदाराें के लिए भारी पड़ रहा है। ऐसे में सरकार ने एक आक्सीजन प्लांट लगाने को प्लान किया है। उत्पादन शुरू करने के लिए कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड ने 25 मई तक की मोहलत मांगी थी। जबकि सरकार ने उत्पादन शुरू करने के लिए तीन सप्ताह का समय निर्धारित किया था। अब आक्सीजन उत्पादन की अवधि और घटाते हुए 15 मई तक निर्धारित कर दी गई है। कार्यदायी संस्था के अवर अभियंता श्याम तिवारी ने बताया कि ऑक्सीजन की उपलब्धता जल्द सुनिश्चित कराने के उद्देश से प्लांट के ढांचे में परिवर्तन किया गया है । नई व्यवस्था में प्लांट के चबूतरे संग अस्थाई छत तैयार किया जा रहा है ।

200 सिलिंडर की रिफिलिंग में तैयार 1800 लीटर

ऑक्सीजन प्लांट में करीब आठ लीटर क्षमता की 200 जंबो सिलिंडर रोजाना तैयार की जाएगी। हांलाकि राजकीय मेडिकल काॅलेज की जरूरतों को देखते हुए क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। अनुमति मिली तो आक्सीजन उत्पादन की क्षमता दो से तीन गुना तक बढ़ जाएगी। कोरोना काल में रोजाना करीब नौ सौ जंबो सिलेंडर खर्च होते हैं, जिसमें करीब पांच टन आक्सीजन भरी जाती है।

एक और प्लांट की मिली सौगात

चक्रपानपुर : जिले में ऑक्सीजन की जबरदस्त मांग को देखते हुए शासन ने राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक और ऑक्सीजन प्लांट तैयार करने की अनुमति दी है। प्रधानाचार्य डॉ. आरपी शर्मा ने बताया कि दूसरे प्लांट के लिए एक करोड़ 12 लाख प्राप्त हुआ है । निर्माण कार्यदाई संस्था ट्राइडेंट न्यूमेटिक कोयंबटूर को दिया गया है जबकि निर्माण के लिए 1 माह की समय सीमा निर्धारित है।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty