वाराणसी में बोले भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा - 'एसआइआर नहीं कांग्रेस अपने कर्मों के कारण हारी'
संबित पात्रा ने वाराणसी में कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी अपनी गलतियों के कारण चुनाव ...और पढ़ें

वाराणसी में संबित पात्रा का कांग्रेस पर पलटवार: 'एसआइआर नहीं, अपने कर्मों से हारी 56 चुनाव'।
HighLights
कांग्रेस 56 चुनाव एसआइआर नहीं, अपने कर्मों से हारी।
मतदाता सूची से नाम हटने के चार कारण बताए।
चुनाव आयुक्तों के सभी निर्णय सर्वसम्मति से हुए।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। भाजपा के सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता ने एसआइआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। कांग्रेस के 2014 से 19 फरवरी 2025 तक कांग्रेस 56 चुनाव हार चुकी है। हम इसे 56 टिकुली कहते हैं। यही 56 टिकुली माथे पर लगा कर राहुल गांधी और कांग्रेस घूम रही है।
उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में पिछले 10 से 40 वर्ष से सत्ता में नहीं होने का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस एसआइआर के कारण नहीं अपने कर्मों और कुकर्मों के कारण हार रही है। संबित पत्र सोमवार को सर्किट हाउस में मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में भ्रम, झूठ को फैलाकर अराजकता का वातावरण बना कर रिजिम चेंज करना चाहती है। अब तक देश में हुए 12 एसआइआर में दस कांग्रेस के कार्यकाल में हुए।
हमारे कार्यकाल में तो 2003 और 2025 में हुए। 2025 की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने 13 करोड़ नाम काटने के आरोपों का भी एक-एक कर जवाब दिया। कहा कि एसआइआर चार तरीके से नाम कटता हैं। पहला अब्सेंट जिसमें तीन करोड़ लोगों के नाम काटे।
दूसरा है शिफ्टेड जिसमें 12 करोड लोगों के नाम कटे जिसमें बाद में 6 करोड लोग शिफ्टेड वाले आ गए। इसी प्रकार 2.8 करोड़ लोग जिनकी मृत्यु हो गई। एक करोड़ नाम डुप्लीकेट थे अर्थात् एक से अधिक जगह उनका नाम था जिस कारण वहकटे। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में पहले मृतक के नाम पर छापा वोट पड़ता था। क्या हम मृतक लोगों का छापा वोट पढ़ने दे।
कहा कि कांग्रेसी कान खोलकर सुन लें कि हम घुसपैठियों का वोट भारत की लोकतंत्र में नहीं होने देंगे। उन्होंने आंकड़ों से यह भी सिद्ध किया कि बंगाल में जिन 20 विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक वोट काटे उसमें ज्यादातर सीट तृणमूल कांग्रेस ने जीती। संबित पात्रा ने कहा कि जहां-जहां भी एसआइआर होता है वहां पर सरकारी बीएलओ के साथ सभी राजनीतिक दलों के बीएलए भी होते हैं।
कोई नाम काटता है तो उसकी सूची राजनीतिक दलों को दी जाती है। उनसे पूछा जाता है कि इसके विषय में आप भी जांच कर लें और बताएं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्या इन राजनीतिक दलों के बीएलए निठल्ले हैं। क्या सपा कांग्रेस के बीएलए का काम भाजपा के बीएलए करेंगे। खुद का काम करते नहीं है और चोर चोर चिल्लाते हैं। दो चुनाव आयुक्तों के विरोध में होने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि तीनों चुनाव आयुक्त ने एक इफीडेविड देकर कोर्ट में कहा है कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से हुए।
ज्ञानेश कुमार की वजह से जीत के आरोपों पर कांग्रेस के राज्य में नियुक्त किए गए निर्वाचन आयुक्त और उनको कांग्रेस द्वारा उपकृत करने को एक-एक कर उल्लेख किया। कहा कि 2012 में नियुक्त मुख्य निर्वाचन आयुक्त वीएस संपत 2015 तक रहे। उस दौरान भाजपा 2014 और अन्य चुनाव को जीती तो क्या कांग्रेस ने संपत की नियुक्ति भाजपा को जीताने के लिए किया था। संदीप पात्रा ने कहा की असली खेल रिज्यूम चेंज का है और यह घुसपैठियों को साथ लेकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। हम किसी कीमत पर ऐसा नहीं होने देंगे।
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