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सोनभद्र, जेएनएन। घोरावल कोतवाली क्षेत्र के उभ्भा गांव में हुए नरसंहार के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच का आदेश दिया है। इसमें पीडि़त ग्रामीणों पर हुई उत्पीडऩात्मक कार्रवाई की जांच एडीजी जोन वाराणसी कर रहे हैं। इस जांच से संबंधित पूछताछ के लिए अक्टूबर 2017 से लेकर अब तक तैनात रहे एक दर्जन पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को चिन्हित किया गया है। इन सबका बयान एडीजी जोन के यहां दर्ज कराया जा रहा है।

उभ्भा में हुए नरसंहार में दस लोगों की मौत हो गई थी और 28 लोग घायल हुए थे। सूत्रों की मानें तो घटना के बाद पुलिस पर आरोप लगे कि प्रधान के दबाव में आकर पुलिस ने एकपक्षीय कार्रवाई की थी। उसमें पीडि़त ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज करने के साथ ही गुंडा एक्ट तक की कार्रवाई की गई है। ऐसे में मामला जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा तो उन्होंने जांच के लिए एडीजी जोन वाराणसी को जिम्मेदारी दी। कहा कि पीडि़त ग्रामीणों का उत्पीडऩ कब और कैसे किया गया इसकी जांच कर दस दिन के भीतर रिपोर्ट दें। इसकी जांच शुरू हो गई है।

जांच के क्रम में उस दौरान घोरावल में तैनात रहे पुलिस अधिकारियों से पूछताछ कर उनका बयान दर्ज कराया जा रहा है। जिनका बयान दर्ज कराया जाना है उनमें एक रिटायर्ड सीओ विवेकानंद तिवारी, निलंबित सीओ अभिषेक ङ्क्षसह और इस समय दुद्धी में तैनात सीओ राहुल मिश्रा के अलावा चार इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि इस अवधि में यहां तैनात रहे इंस्पेक्टर आशीष ङ्क्षसह, मूलचंद्र चौरसिया, शिव कुमार मिश्रा व अरविंद कुमार मिश्रा, उप निरीक्षक पद्मकांत तिवारी, लल्लन यादव व बीट के सिपाही भी शामिल हैं। सीओ की विवेचनाओं का पर्यवेक्षण करने वाले दो अपर पुलिस अधीक्षकों से भी बयान लिया जा सकता है।

 

Posted By: Saurabh Chakravarty

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