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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 08, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

काष्ठकला में कुशल महिलाएं हो रहीं आत्मनिर्भर, हर माह 15 से 20 हजार कर रहीं अतिरिक्त कमाई

By Abhishek SharmaEdited By:
Published: Mon, 08 Nov 2021 11:00 AM (IST)

देश में लकड़ी के खिलौने मात्र बच्चों को मनाने-रिझाने तक सीमित नहीं रहे बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की आय ...और पढ़ें

युवतियों ने भी काष्ठ कला में अपना भाग्य आजमाना शुरू कर दिया है।
युवतियों ने भी काष्ठ कला में अपना भाग्य आजमाना शुरू कर दिया है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। लकड़ी के खिलौने मात्र बच्चों को मनाने-रिझाने तक सीमित नहीं रहे बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की आय का जरिया भी बन गए हैं। यही कारण है कि नगर में हजारों महिलाएं यहां तक कि युवतियों ने भी काष्ठ कला में अपना भाग्य आजमाना शुरू कर दिया है। इसमें उन्हें भरपूर लाभ होने लगा है। इसके लिए एमएमएमई विभाग की ओर से प्रशिक्षण के लिए 300 रुपये प्रतिदिन दिए भी जा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण के दौरान ही उत्पादन कार्य करने पर मजदूरी भी दी जा रही है। ऐसे में कुल मिलाकर ये शिल्पी हर महीने 15 से 20 हजार रुपये की कमाई कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये कमाई घर के काम के साथ की जा रही है। लोलार्क कुंड निवासी शुभी अग्रवाल बताती हैं कि वाराणसी में 1500 ऐसे परिवार हैं जिनका काष्ठ कला से सीधा संबंध है। इससे जुड़कर ये परिवार अपनी आर्थिक तरक्की का मार्ग प्रशस्त किया है। बहुत सारी महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने घर के काम के साथ लकड़ी के शानदार खिलौने बनाकर समाज की उन महिलाओं के लिए उदाहरण पेश किया है जो एक एक रुपये के लिए मारे मारे फिर रही हैं।

जीआई टैग और 30 करोड़ का बाजार : लकड़ी के खिलौने का कुल कारोबार अब 30 करोड़ के पार पहुंच गया है। प्राचीन काल से लकड़ी के खिलौने लोगों के लिए मनोरंजन का साधन रहे हैं। उस दौरान बमुश्किल पांच या दस की संख्या में खिलौने बन पाते थे लेकिन शुभी अग्रवाल बताती हैं कि उनके यहां की लगभग दो हजार प्रकार के खूबसूरत खिलौने बनाये जाते हैं। वहीं जीआई टैग लग जाने से खिलौने की महत्ता बढ़ गयी है। वाराणसी के इस खास उत्पाद को दुनिया जानने लगी है।

काष्ठ कला में भी मां अन्नपूर्णा देवी का श्रृंगार: अभी तक लक्ष्मी-गणेश समेत चिड़ियों, जानवरों, राजा-रानी समेत कई प्रकार के मूतियाँ और खिलौने शिल्पियों द्वारा बनाये जाते रहे हैं इस बार मां अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति बनाकर भक्तों के सामने उपलब्ध किया गया है। ऐसी मूर्तियों को ग्राहकों ने खूब पसंद किया है। शिल्पियों ने अपनी कला का प्रदर्शन इस प्रकार से किया है कि देखने वाला मंत्रमुग्ध हो जाय। शानदार नक्काशी से मां अन्नपूर्णा का दिव्य रूप दिखाई देने लगा है।

इंटरनेट मीडिया से विदेशों तक में ब्रांडिंग: कोरोना काल में भले ही सभी माध्यमों के यातयात प्रभावित रहे हों फिर भी लोगों घर पर रहकर इंटरनेट माध्यमों से अपनी कला का प्रचार प्रसार किया है। यही कारण है कि सिंगापुर जैसे देश से लकड़ी के खिलौनों की मांग हुई। इसके साथ दूसरे देशों अमेरिका, जापान समेत कुछ यूरोपीय देशों में भी लकड़ी के खिलौने भेजे जा रहे हैं।