आजमगढ़, जेएनएन। 'कद्र अब तक तेरी तारीख ने जानी ही नहीं, तुझमें शोले भी हैं बस अश्क फिशानी ही नहीं। तू हकीकत भी है दिलचस्प कहानी ही नहीं, तेरी हस्ती भी है इक चीज जवानी ही नहीं। अपनी तारीख का उन्वान बदलना है तुझे उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे...।'

हैदराबाद के एक मुशायरे में कैफी आजमी ने जैसे ही अपनी मशहूर नज्म 'औरत' को सुनाया, उस समय अपने भाई के साथ मुशायरे में पहली सफ (लाइन) में बैठीं शौकत, कैफी पर अपना दिल हार बैठीं। इस इश्क में वह यह भी भूल गईं कि उनकी मंगनी किसी और से हो चुकी है। अपनी मोहब्बत में उन्होंने हर इम्तेहान को पास किया और आखिर में शौकत, शौकत आजमी बन गईं। आजमगढ़ के फूलपुर के मेजवां में जन्मे मशहूर शायर, लेखक व गीतकार कैफी आजमी की पत्नी, मशहूर सिने तारिका शबाना आजमी और कैमरामैन बाबा आजमी की मां शौकत आजमी (90 वर्ष) अब इस दुनिया में नहीं रहीं।

कैफी आजमी वेलफेसर सोसायटी के डिप्टी मैनेजर आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि शौकत आजमी का इंतकाल गुरुवार की देर शाम मुुंबई में हो गया। वह काफी समय से बीमार थीं। उन्होंने बताया कि शौकत आजमी का अंतिम संस्कार वहीं होगाा। क्योंकि शबाना आजमी व बाबा आजमी सहित पूरा परिवार मुंबई में ही रहता है । इधर, उनके इंतकाल की सूचना मिलते ही कैफी आजमी के पैतृक गांव मेजवां के आवास फतेह मंजिल सहित पूरे बक्सपुर मेजवा गांव के लोग दुखी हैं।

Posted By: Abhishek Sharma

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