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यूपी के बलिया का मां ब्रह्माणी देवी मंदिर: राजा सूरथ ने कराया था निर्माण, क्या है पौराणिक इतिहास?

Published: Mon, 12 Oct 2026 10:16 AM (IST)

Shardiya Navratri 2026 | बलिया के ब्रह्माइन गांव में स्थित प्राचीन मां ब्रह्मचारिणी देवी मंदिर का वर्णन किया गया है, जो भक्तों के लिए एक प्रमुख आस्था का केंद्र है।

Shardiya Navratri 2026 | मां ब्रह्माणी देवी मंदिर।

Shardiya Navratri 2026 | मां ब्रह्माणी देवी मंदिर।

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जागरण संवाददाता, बलिया। Shardiya Navratri 2026 | जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर बलिया-सिकंदरपुर मार्ग के समीप स्थित ब्रह्माइन गांव का मां ब्रह्माणी देवी मंदिर आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। 

मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप में पूजित इस प्राचीन मंदिर में पूरे वर्ष, विशेषकर शारदीय व चैत्र नवरात्र के दौरान, मां के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
 
यहां आसपास के कई जिलों से भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं, पुरातन स्मृतियां और दिव्य वातावरण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। नवरात्र के दिनों में पूरे मंदिर परिसर में 'जय माता दी' के जयकारों के साथ मां के दर्शनों के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।

क्या है ब्रह्मचारिणी मंदिर का इतिहास?

भगवती मंदिर के पौराणिक इतिहास को लेकर मान्यता है कि प्राचीन काल में राजा सुरथ ने सुरहा ताल के निकट स्थित पांच प्रमुख मंदिरों का निर्माण कराया था, जिनमें आदिशक्ति मां ब्रह्मचारिणी देवी का यह पवित्र मंदिर भी शामिल है।

देवी पुराण में भी इस ऐतिहासिक प्रसंग का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। हालांकि राजा सुरथ ने इस मंदिर का पुनरोद्धार कराया था, लेकिन देवी मां के प्राकट्य का काल उससे भी कहीं प्राचीन माना जाता है।

कालंतर में, स्थानीय श्रद्धालुओं के निरंतर सहयोग और अटूट आस्था से मंदिर का नवनिर्माण संपन्न हुआ। वर्तमान में यह मंदिर अपने दिव्य स्वरूप और अलौकिक भव्यता के साथ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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मंदिर की विशेषताएं

वैसे तो साल भर मां के दरबार में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के पावन अवसर पर यहां भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ता है।

इस दिव्य धाम के प्रति श्रद्धालुओं में अगाध श्रद्धा व अटूट विश्वास है। मान्यता है कि देवी माँ के श्री चरणों के दर्शन मात्र से ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें हर प्रकार के सांसारिक कष्टों व भौतिक पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है।

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श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं मां

देवी मां के दरबार में आते ही सुख-शांति की अनुभूति होने लगती है। मां श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इच्छित फल की प्राप्ति होती है। देवी के प्रति सभी भक्त के मन में अपार श्रद्धा रहती है।

बृजेश तिवारी, पुजारी

नवरात्र के अवसर पर मंदिर की साज सज्जा व व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। पथ प्रकाश साफ-सफाई आदि व्यवस्था के साथ प्रबंधन समिति अभी दर्शनार्थियों की सेवा में तत्परता से जुटा है।

डॉ. अनिल तिवारी, प्रबंधक