वाराणसी, जेएनएन। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में करीब ढाई साल पहले हुई 17 अध्यापकों की नियुक्तियां सवालों के घेरे में आ गई हैं। राजभवन ने उर्दू विभाग के तीन अध्यापकों की नियुक्ति निरस्त कर दी है। वहीं इस दौरान हुईं सभी नियुक्तियों  का दोबारा परीक्षण कराने का भी आदेश दिया है। इसे लेकर विश्वविद्यालय में खलबली मची हुई है। राजभवन का आदेश मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियुक्ति की फाइलें सील करा दी हैं ताकि कोई छेड़छाड़ न हो सके।   

जनवरी वर्ष 2018 मेंं तत्कालीन कुलपति डा. पृथ्वीश नाग के कार्यकाल में मनोविज्ञान, उर्दू, वाणिज्य, अंग्रेजी, विधि, अर्थशास्त्र, मैथ, मनोविज्ञान व ललित कला विभाग में करीब 17 अध्यापकों की नियुक्तियां हुई थीं। कुछ अभ्यर्थियों ने उर्दू विभाग में हुई नियुक्तियों की शिकायत राजभवन से भी की थी। जांच में शिकायत सही पाया गया है। इसे देखते हुए राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने उर्दू विभाग में तीन अध्यापकों की नियुक्तियां निरस्त करने का आदेश दिया है। इसके अलावा अनियमित तरीके से हुई नियुक्ति की जांच सीआइडी से कराने का भी निर्देश दिया है। यही नहीं उस दौरान हुई नियुक्तियों का दोबारा परीक्षण कराने के लिए कुलपति की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित करने का भी आदेश दिया है। इसमें उच्च शिक्षा निदेशालय के (प्रयागराज) व बीएचयू के किसी एक प्रोफेसर को सदस्य बनाने का निर्देश दिया गया है।

राजभवन की ओर से जारी आदेश मंगलवार को विद्यापीठ के कुलपति को भी मिल गया है। हालांकि इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन फिलहाल मौन है। कुलसचिव डा. एसएल मौर्य ने बताया कि राजभवन ने उर्दू विभाग में हुई नियुक्तियों के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। सभी पत्रावलियां राजभवन भेज भी दी गई थीं।

इन विभागों में हुई थीं अध्यापकों की नियुक्तियां 

04 अर्थशास्त्र 

03 उर्दू 

03 अंग्रेजी 

02 वाणिज्य 

02 मनोविज्ञान 

01 विधि 

01 ललित कला 

01 मैथ 

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