वाराणसी, जेएनएन। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज  (टीसीएस) ने संस्कृत के छात्रों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया है। इसके तहत टीसीएस ने पहले संस्कृत के छात्रों को अंग्रेजी भाषा में दक्ष करेगी। अंग्रेजी भाषा व रोजगारपरक प्रशिक्षण देने के बाद संस्कृत के छात्रों को विभिन्न पदों पर रोजगार उपलब्ध कराने का टीसीएस ने निर्णय लिया है। इससे डिजिटल दुनिया में प्राच्‍य भाषा संस्‍कृत का भी महत्‍व बढ़ गया है।

 इस संबंध में गत दिनों टीसीएस ने बेंगलुरु में संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक बुलाई थी। 20 व 21 अक्टूबर को बेंगलुरु में हुई बैठक में टीसीएस के पूर्व उपाध्यक्ष श्रीराम दुरयी व आइकान प्रमुख वेंगु स्वामी रामा स्वामी ने बताया कि कंपनी पहले संस्कृत के छात्रों को रोजगार योग्य बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षित करेंगी ताकि उन्हें कंपनी के योग्य बनाकर जॉब उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए अंग्रेजी, कंप्यूटर के साथ-साथ साक्षात्कार के लिए उन्हें तैयार करेंगी। प्रथम चरण में टीसीएस शास्त्री के विद्यार्थियों को दक्ष करने का निर्णय लिया है। बैठक में शामिल रहे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने बताया कि टीसीएस के इस फैसले से प्राच्य विद्या के संरक्षण को बल मिलेगा। विद्यार्थियों में संस्कृत पढऩे की रूचि बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि संस्कृत के छात्रों के लिए टीसीएस ने एक ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया है जो छात्रों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। इस साफ्टवेयर के माध्यम से टीसीएस ने न केवल छात्रों को अपितु अध्यापकों को भी विशेष ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया है ताकि अध्यापकों को भी नवीनतम तकनीकी से अपडेट किया जा सके। उन्होंने बताया कि पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन के लिए भी टीसीएस भी विमर्श हो रहा है। इस मौके पर टीसीएस ने 'संस्कृत हब' नामक एक एप भी लांच किया। बैठक में वाराणसी के अलावा दिल्ली, तिरुपति, नागपुर, हरियाणा, असम, गुजरात, जयपुर सहित अन्य संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपति, यूजीसी के सदस्य सहित अन्य उपस्थित रहे। 

Posted By: Abhishek Sharma

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