विश्व में शांति और सद्भाव के लिए सनातन संस्कृति ही एकमात्र रास्ता : प्रबोधानंद
महामंडलेश्वर प्रबोधानंद महाराज ने सनातन संस्कृति को विश्व शांति और सद्भाव का एकमात्र मार्ग बताया। उन्होंने भारत पर हो रहे सांस्कृतिक हमलों और जनसंख्या असंतुलन पर गहरी चिंता व्यक्त की।

प्रबोधानंद महाराज: सनातन संस्कृति ही विश्व शांति और सद्भाव का आधार।
HighLights
सनातन संस्कृति विश्व शांति और सद्भाव का एकमात्र मार्ग।
भारत पर सांस्कृतिक और वैचारिक हमलों पर चिंता व्यक्त की।
जनसंख्या असंतुलन और परिवार नियोजन पर गंभीर विचार।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर प्रबोधानंद महाराज ने कहा कि विश्व में शांति, सद्भाव और मानवता की रक्षा के लिए सनातन संस्कृति ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि भारत पर मुगलों और ईसाइयों के हमले इतिहास तक सीमित नहीं रहे, बल्कि आज भी विभिन्न रूपों में जारी हैं। इनमें सबसे गंभीर हमला सांस्कृतिक और वैचारिक है, जिसका पता लोगों को भी नहीं चल पाता।
महामंडलेश्वर प्रबोधानंद ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने भी इस विषय पर गंभीरता से अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय संस्कृति पर हो रहे आंतरिक हमलों पर आत्मचिंतन करने की जरूरत है। हर घर में जन्मदिन पर ‘हैप्पी बर्थडे’ मनाने का चलन बढ़ गया है। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ईसाइयत की ओर ले जाने का मार्ग है।
उन्होंने परिवार और जनसंख्या से जुड़े मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले ‘हम दो, हमारा एक’ का नारा दिया जाता था, लेकिन अब स्थिति ‘हम दो, हमारा कोई नहीं’ तक पहुंच गई है। दूसरी ओर, कुछ लोग ‘हम चार, हमारे 40’ की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि परिवारों में बच्चों की संख्या कम होने से भविष्य में समाज को महात्मा और संत मिलने में भी कठिनाई हो सकती है।