वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के अध्यापक जहां नियुक्ति अनियमित ठहराने में जुटे हुए हैं, वहीं कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे अपनी बात पर अड़े हुए हैं। उन्होंने नियमानुसार नए नियमों के तहत नियुक्ति का दावा किया है।

कुलपति ने बताया कि यूजीसी की नई गाइड लाइन के अनुसार परिनियम संशोधित किए जा चुके हैं। कार्य परिषद इसका अनुमोदन भी कर चुकी है। कहा कि कार्यपरिषद की वीडियो रिकार्डिग राजभवन भी भेजी जा चुकी है। कहा कि राजभवन की अनुमति से ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के समक्ष राजभवन द्वारा 15 सितंबर को जारी उस पत्र को भी दिखाया जिसमें कुलाधिपति ने नियुक्ति की अनुमति प्रदान की है। उन्होंने बताया कि शासन से भी नियुक्ति करने की हरी झंडी मिल चुकी है। शासन का स्पष्ट मत है कि जिन पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पहले से चल रहीं है। उन पदों पर नियुक्ति के लिए कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार का पत्र भी दिखाया।

रोका कॉल लेटर : दूसरी ओर नियुक्ति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। बौद्ध दर्शन विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के आवेदक सुधांशु द्विवेदी ने विवि प्रशासन पर मनमाने तरीके से कॉल लेटर रोकने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने कुलाधिपति को एक पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि संस्कृत विवि से इतर संस्था से स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल करने के कारण उन्हें कॉल लेटर नहीं जारी किया गया।

Posted By: Jagran

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