काशी में ग्रामीण किशोरों के हुनर को मिला मंच, अस्सी घाट पर लगी प्रदर्शनी
काशी के अस्सी घाट पर दीपावली के अवसर पर दो दिवसीय 'हुनर' प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण किशोरों ...और पढ़ें

काशी के अस्सी घाट पर 'हुनर' प्रदर्शनी में ग्रामीण प्रतिभाओं का शानदार प्रदर्शन।
HighLights
अस्सी घाट पर दो दिवसीय 'हुनर' प्रदर्शनी का आयोजन।
ग्रामीण किशोरों ने हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए।
कौशल विकास और आत्मनिर्भरता को मिला बढ़ावा।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। दीपावली के पावन पर्व को और अधिक खास बनाने तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करने के उद्देश्य से वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर दो दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वसंत कन्या महाविद्यालय (वीकेएम), कमच्छा के गृह विज्ञान विभाग की ओर से 2 एवं 3 नवंबर को ‘हुनर – सीखें, बनाएं और आत्मनिर्भर बनें’ शीर्षक के तहत इस अनूठे आयोजन का शुभारंभ किया गया। इस प्रदर्शनी में ग्रामीण क्षेत्रों के किशोरों और बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए सुंदर हस्तनिर्मित सजावटी और उपयोगी उत्पादों की बंपर बिक्री और प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
संस्थाओं के सहयोग से तराशी गई प्रतिभा
इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में पूर्णमयी एजुकेशनल ट्रस्ट, कुरसातो (जंसा) तथा सुनयना संस्था, जीवाधिपुर (चंदौली) से जुड़ी किशोरियों और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुनयना संस्था की समन्वयक एवं राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. सुधा पांडेय ने बताया कि गुड़िया, सविता, संगीता, हसीना, मनीती, रिया, नेहा, मोनी, वंदना, रीता, अंजलि, सुषमा और सुमन ने सुषमा एवं समृद्धि के मार्गदर्शन में बेहतरीन उत्पाद तैयार किए।
इसी प्रकार, पूर्णमयी एजुकेशनल ट्रस्ट के समन्वयक प्रियंका मिश्रा और अजितेश श्रीवास्तव के निर्देशन में लवली, सोनपरी, लकी, हिमांशु, श्रेया, साक्षी, बबली, ज्ञांति, शिवम और आरोही ने अपनी असाधारण रचनात्मकता का परिचय दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आर्यन इंटरनेशनल स्कूल की कक्षा छह की मेधावी छात्रा आराध्या तिवारी रहीं, जिन्होंने अपनी क्रोशिया कला से निर्मित मनमोहक वस्तुओं का प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
छात्राओं ने संभाली प्रबंधन की कमान
इस वृहद कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन गृह विज्ञान विभाग, वीकेएम की पीजी अंतिम वर्ष की छात्राओं—रोमी, रोशनी और श्वेता द्वारा उद्यमिता प्रबंधन के प्रायोगिक पाठ्यक्रम के तहत किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. आशा यादव ने इस पूरी पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बेहद उपयोगी और सराहनीय कदम बताया।
वहीं, महाविद्यालय की प्रबंधिका उमा भट्टाचार्या ने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों के भीतर उद्यमशीलता, गहरी सामाजिक संवेदनशीलता और व्यावहारिक कौशल को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस संपूर्ण पाठ्यक्रम और आयोजन की रूपरेखा पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. अंशु शुक्ला एवं विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता देवड़िया के निर्देशन में तैयार की गई थी, जिसमें शोधार्थी शालिनी प्रिया और संयोगिता सिंह ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
'लैब टू लैंड' की अवधारणा को मिला बढ़ावा
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण बच्चों और किशोरों के पारंपरिक व रचनात्मक कौशल को एक व्यापक बाजार देना था। साथ ही, उन्हें उत्पाद निर्माण, मूल्य निर्धारण और विपणन की बारीकियों से परिचित कराना था। गृह विज्ञान विभाग का यह प्रयास यूजीसी की सामुदायिक सहभागिता की भावना के अनुरूप 'कैंपस-कम्युनिटी कनेक्ट' और 'लैब टू लैंड' की अवधारणा को धरातल पर उतारने का एक सफल प्रयास साबित हुआ, जिसमें शिक्षा को समाज की प्राथमिक जरूरतों और आजीविका से जोड़ा गया।
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