दिसंबर में शुरू हो जाएगा रोपवे, बनारस शहर में मिलेगा गोंडोला से शानदार हवाई सफर का मौका
वाराणसी में लंबे इंतजार के बाद दिसंबर में रोपवे सेवा शुरू होने जा रही है, जो शहर में तेज, सुरक्षित ...और पढ़ें

दिसंबर में शुरू होगा वाराणसी रोपवे, शहर में मिलेगा शानदार हवाई सफर का मौका। जागरण
HighLights
दिसंबर में वाराणसी रोपवे सेवा होगी शुरू, मिलेगी तेज कनेक्टिविटी।
भारत का पहला शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे, आधुनिक गोंडोला सिस्टम।
सुरक्षा के लिए उन्नत तकनीक, बैकअप सिस्टम और प्रशिक्षित बचाव दल।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दिसंबर में रोपवे शुरू होने जा रहा है। घनी आबादी वाले और जाम वाले क्षेत्रों में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को तेज, सुरक्षित व प्रदूषण-रहित कनेक्टिविटी मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 मार्च 2023 को इसकी आधारशिला रखी थी।
इसका निर्माण मई 2023 से काम शुरू हुआ। अब जिले में देश का पहला शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे आधुनिक सिस्टम से लैस है। रोपवे की परियोजना प्रबंधक पूजा मिश्र ने जागरण से बातचीत में बताया कि यह तकनीक विश्व की नवीनतम और सुरक्षित प्रणालियों में शुमार है।

रोपवे के गोंडोला से कुछ इस प्रकार दिखेगा अपना शहर। - जागरण
उन्होंने कहा कि बोलीविया और मेक्सिको सिटी जैसे शहरों में भी रोपवे चल रहे हैं, लेकिन वहां पहाड़ी इलाका है। वाराणसी समतल क्षेत्र होने के बावजूद इस आधुनिक तकनीक को अपनाया गया है। मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला सिस्टम में गोंडोला रस्सी से जुड़ा रहता है, लेकिन स्टेशन के अंदर आने पर स्वतः अलग हो जाता है और धीमी गति से चलने लगता है।
इससे यात्री आसानी से चढ़-उतर सकते हैं। रोपवे की अधिकतम गति छह मीटर प्रति सेकंड (लगभग 21-22 किलोमीटर प्रति घंटा) रखी गई है। स्टेशन के अंदर यह गति घटकर मात्र 0.2 मीटर प्रति सेकंड रह जाती है। स्टेशन के अंदर पूरा सफर करीब 45 सेकंड में पूरा हो जाता है। हर गोंडोला में 10 यात्री बैठ सकेंगे।

अर्नब चक्रवात के असर के बीच तेज हवाओं और बारिश के बीच गोंडोला पर सुरक्षित सफर। - जागरण
बिजली गुल होने या किसी ड्राइव सिस्टम के फेल होने पर एनीमोमीटर हो जाएगा सक्रिय
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने विस्तार से बताया कि सभी टावरों पर एनीमोमीटर लगाए गए हैं। हवा की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा होने पर सिस्टम अपने आप बंद हो जाएगा। बिजली गुल होने या किसी ड्राइव सिस्टम के फेल होने की स्थिति में बैकअप सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है और गोंडोला निकटतम स्टेशन तक पहुंच जाता है। अचानक रुकने जैसी कोई स्थिति नहीं बनेगी।
बचाव दल स्विट्जरलैंड से प्रशिक्षित
रोपवे का बचाव दल स्विट्जरलैंड में प्रशिक्षित है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम ने हाल ही में निरीक्षण किया है। हर गोंडोला पर नंबर अंकित होगा और हेल्पलाइन के जरिए कंट्रोल रूम से तुरंत संपर्क किया जा सकेगा। गोंडोला के दरवाजे अंदर से नहीं खुलते, ताकि बचाव अभियान के दौरान सुरक्षा बनी रहे।

प्लेटफार्म पर इस तरह गोंडोला आकर रुकेगा और यात्रियों को लेकर जाएगा। जागरण
यह सिस्टम पूरी तरह कार्बन उत्सर्जन मुक्त
यह सिस्टम पूरी तरह कार्बन उत्सर्जन मुक्त है और जमीन की बहुत कम जगह घेरता है। वाराणसी जैसे घने शहर के लिए यह सबसे उपयुक्त विकल्प है। पहले चरण में कैंट से गोदौलिया तक सेवा शुरू होगी। कैंट स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर-9 से सीधे कनेक्टिविटी दी गई है। विद्यापीठ और रथयात्रा स्टेशन भी यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं।
कैंट से गोदौलिया तक का किराया लगभग 50 रुपये
किराया कैंट से गोदौलिया तक लगभग 50 रुपये रखा गया है। नेशनल कामन मोबिलिटी कार्ड पर 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। पहले छह महीने सिस्टम के संचालन को ध्यान से देखा जाएगा और जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जाएंगे।

सुरक्षा इतनी कड़ी कि रेडिएशन के उपकरणों तक को जांच में पकड़ लिया जाएगा। जागरण
गोदौलिया स्टेशन पर बोर्डिंग-डिबोर्डिंग का काम अंतिम चरण में
सेक्शन-वन पूरी तरह तैयार है। सेक्शन-टू में गिरजाघर स्टेशन तैयार हो चुका है, जबकि गोदौलिया स्टेशन पर बोर्डिंग-डिबोर्डिंग का काम अंतिम चरण में है और कुछ दिनों में पूरा हो जाएगा। स्विट्जरलैंड से आई टीम सिस्टम की जांच कर रही है। प्रत्येक गोंडोला और सिस्टम के लिए सख्त एसओपी का पालन किया जा रहा है। सुरक्षा सलाहकार भी तैनात हैं। परियोजना का 96 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य आटोमेशन और स्काडा सिस्टम का है, जिसकी जांच विश्व स्तर की कंपनी कर रही है।

टिकट काउंटर के पास क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। जागरण
महाविद्यालय के छात्रों के लिए बेहतर हो जाएगी सुविधा
काशी विद्यापीठ स्टेशन महाविद्यालय के छात्रों के लिए विशेष सुविधाजनक साबित होगा। यहां से गोदौलिया आने-जाने में छात्रों को विशेष लाभ मिलेगा। यह रोपवे शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में आवागमन को आसान बनाएगा और पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों के लिए भी नया विकल्प बनेगा।
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