यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 24, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Research in BHU Ayurveda Faculty : डाइटिंग न व्यायाम, तीन माह में छह से दस किलो वजन कम
बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय में काय चिकित्सा विभाग के विज्ञानियों ने एक महत्वपूर्ण शोध में दुनिया ...और पढ़ें

वाराणसी, शैलेश अस्थाना : अपनी व्यस्त व अनियमित दिनचर्या के कारण आप मोटे हो रहे हैं और योग-व्यायाम के लिए समय नहीं निकाल पा रहे तो एक अच्छी खबर है। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय में काय चिकित्सा विभाग के विज्ञानियों ने एक महत्वपूर्ण शोध में दुनिया में तेजी से बढ़ती ओबेसिटी (मोटापे) का उपचार ढूंढ लिया है। 82 मरीजों के दो समूहों पर किए गए प्रयोग में विज्ञानियों ने तीन माह में छह से दस किलो वजन कम करने में सफलता पाई है।
यह संभव हुआ केवल आयुर्वेद की शास्त्रीय औषधियों के प्रयोग से। खास बात यह कि इन दवाओं से साइड इफेक्ट तो दूर, व्यक्ति की आंतरिक शारीरिक शक्ति में वृद्धि ही हुई। डायबिटीज, हाइपरटेंशन, शुगर स्तर घटा तो ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले खराब कोलेस्ट्राल की मात्रा घटी और अच्छे कोलेस्ट्राल में वृद्धि हुई। यही नहीं, गुणवत्तापूर्ण जीवन के विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के चार मानकों फिजिकल, साइकोलाजिकल, वातावरण संबंधी और सामाजिक में से दो मानकों फिजिकल, साइकोलाजिकल के मूल्यांकन का परिणाम भी उत्साहजनक पाया गया।
तीन माह तक किया गया अध्ययन
यह शोध एसोसिएट प्रोफेसर डा. अजय पांडेय के निर्देशन में एमडी की छात्रा डा. मीनू ने किया है। डा. मीनू ने बताया कि शोध के दौरान मोटापे से ग्रस्त 40 से 60 वर्ष के 82 मरीजों के दो समूह बनाए। 42 मरीजों वाले एक समूह को तीन माह तक फलत्रिकादि घनवटी की एक-एक टेबलेट तीनों समय लेखनीय महाकषाय क्वाथ के 40 मिलीलीटर के साथ दी गई। 40 मरीजों वाले दूसरे समूह को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इस्तेमाल होने वाली दवा मेटफार्मिन-500 एमजी की निर्धारित खुराक दिन में एक बार दी गई।
तीन-चार गुना बेहतर परिणाम
तीन माह बाद जब दोनों समूहों के मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तो परिणाम हैरान करने वाला था। अंग्रेजी दवा ले रहे समूह की तुलना में आयुर्वेदिक औषधि ले रहे लोगों का वजन तीन से चार गुना कम हुआ। इतना ही नहीं, एब्डामिनल ओबेसिटी (तोंद) व वेस्ट सरकमफेरेंस (कमर का घेरा) भी कम होने लगा।
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प्रत्येक मानकों पर दिखा सुधार
आयुर्वेदिक औषधि लेने वाले समूह का औसत वजन तीन माह में 6-10 किलोग्राम घटा, हीं अंग्रेजी दवा लेने वालों के वजन में 2-3 किलोग्राम कमी आई। बाडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) आयुर्वेदिक औषधि से औसतन 30 से घटकर 27 हुआ। अंग्रेजी दवा में यह 29.7 से 29.5 रहा। पहले समूह के लोगों की एब्डामिनल ओबेसिटी भी औसतन 120 से 114 सेमी घटा, जबकि मेटफार्मिन-500 से 119.9 से 119.6 सेमी कमी आई।
आयुर्वेद से कोलेस्ट्राल (टीजीएल) की मात्रा 290 से कम होकर 166.3 एमजी/डीएल हुई तो एलोपैथ की दवा से 277.6 एमजी/डीएल से 263.5 एमजी/डीएल ही कम हुई। पहले समूह के लोगों का गुड कोलेस्ट्राल (एचडीएल) बढ़कर 36.68 एमजी/डीएल से 50.87 एमजी/डीएल हुआ तो अंग्रेजी दवा लेने वालों का 35.94 से बढ़कर 36.82 एमजी/डीएल हुआ। आयुर्वेदिक दवा से मरीजों का शुगर (फास्टिंग) 138.3 से घटकर 108.29 तक पाया गया। वहीं, अंग्रेजी दवा से यह 144.59 से 106.8 पर आया। आयुर्वेदिक दवा लेने वालों का ब्लड प्रेशर (सिस्टोलिक) औसत 130 से घटकर 118 हुआ तो एलोपैथिक दवा से 130 से 120 हुआ।
डब्लूएचओ के गुणवत्ता पूर्ण जीवन के मानकों पर भी आयुर्वेदिक औषधि लेने वाले समूह के लोग शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से बेहतर पाए गए। इन मानकों का निर्धारण 26 प्रश्नों के उत्तरों के आधार पर किया जाता है। वहीं, एलोपैथ दवा लेने वाले इन दोनों मानकों पर अप्रभावित रहे।
फलत्रिकादी घनवटी
आयुर्वेद के ग्रंथ ‘योग रत्नाकर’ में वर्णित एक औषधीय टेबलेट है। इसमें त्रिफला (हर्र, बहेड़ा, आंवला), त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली) का योग होता है।
लेखनीय महाकाषाय
क्वाथ ‘चरक संहिता’ में वर्णित 50 महाकषायों में से एक है। इसमें नागरमोथा, कुष्ट, कुटकी, वचा (बालवज), हरिद्रा (हल्दी), चित्रक (चिरायता), चिरबिल (चिलबिल), हेमवती, अतिविषा होता है।
इस शोध में प्रयुक्त आयुर्वेदिक औषधियां शास्त्रीय हैं

इस शोध में प्रयुक्त आयुर्वेदिक औषधियां शास्त्रीय हैं। ये औषधियां सिर्फ मेटाबोलिज्म (चयापचय) को ही ठीक नहीं करतीं, वरन रोगी के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती हैं। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के पास कोई ऐसी अकेली दवा नहीं, जो इतनी बीमारियों पर इतना प्रभावी हो। इन बीमारियों के लिए अनेक दवाएं लेनी पड़ती हैं, लेकिन यह औषधि अकेले ही कई बीमारियों को ठीक कर हमें स्वस्थ रखने में कारगर पाई गई है।
-डा. अजय पांडेय (एसोसिएट प्रोफेसर, काय चिकित्सा विभाग, आयुर्वेद संकाय, बीएचयू)
कैप्शन
बीएचयू के आयुर्वेद संकाय की लैब में लेखनीय महाकाषाय बनातीं डा. मीनू। स्रोत जागरण
लेखनीय महाकाषाय और फलत्रिकादि घनवटी की टेबलेट। स्रोत- जागरण
डा. अजय पांडेय, एसोसिएट प्रोफेसर, आयुर्वेद संकाय, बीएचयू। स्रोत- जागरण