जागरण संवाददाता, जौनपुर : जंगीपुर गांव के आदर्श धर्म मंडल की ऐतिहासिक रामलीला आज भी अपनी विशिष्ट पहचान संजोए हुए है। दो सौ वर्ष पूर्व विश्व प्रसिद्ध काशी की रामनगर की रामलीला की तर्ज पर यहां भी दिन में भ्रमण कर रामलीला होती थी। हालांकि वर्ष 1921 से गांव के प्राथमिक विद्यालय के समीप बने स्थायी मंच पर अनवरत मंचन किया जा रहा है। इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके मंचन में पांच ग्रंथों में वर्णित प्रसंगों का समावेश किया जाता है।

आयोजक मार्कंडेय सिंह ने बताया कि रामलीला मंचन की सारी तैयारी पूरी कर ली गई हैं। आगामी 30 सितंबर से छह अक्टूबर तक मंचन होना है। रामलीला रामचरित मानस, राधेश्याम रामायण, बसुनायक रामायण, वाल्मीकि रामायण एवं रामरस सुधा जैसे ग्रंथों में वर्णित प्रसंगों के समावेश से होती है।

काशी की तर्ज पर पहले जंगीपुर में मुकुट पूजा, राम चबूतरा, रामजन्म, सीता उत्पत्ति, चित्तौड़ी में जयंत आक्रमण, मिरसादपुर कांवरिया बाग में सीता हरण, सरायहरखू सूरे की बाग में राम-सुग्रीव मिताई, औंका हनुमान मंदिर पर भरत मिलाप के अलावा हैदरपुर, तड़सरा, अलहदिया सहित दर्जन भर गांवों में भ्रमण कर भ्रमणकारी लीला दिन में होती थी। बाद में लोगों की कठिनाइयों को देखते हुए स्थायी रंगमंच का निर्माण कर रात में रामलीला मंचन शुरू हुआ जो अनवरत जारी है।

महानगरों से आकर करते हैं मंचन

रामलीला शुरू होने से पहले मुंबई, गुजरात व दिल्ली जैसे महानगरों में रोजी-रोटी के सिलसिले में रह रहे पात्र समय से पहुंचकर अपने अभिनय का पूर्वाभ्यास शुरू कर देते हैं। रामलीला समिति ने इस वर्ष जय सिंह को प्रबंधक बनाया है। वहीं अध्यक्ष गुलाब सिंह, कोषाध्यक्ष टीपी गुप्त, निर्देशक संजय सिंह व रंगमंच संचालक की जिम्मेदारी जयशंकर सजल मिश्र को दी गई है। यहां निर्मित राम चबूतरे का खासा महत्व है। मान्यता है कि इस चबूतरे पर कसम खाकर व खिलाकर आज भी छोटे-मोटे वाद-विवाद को खत्म करा दिया जाता है।

यह हैं पांच ग्रंथ जिनके समावेश से होती है रामलीला

राधेश्याम रामायण

इसकी रचना राधेश्याम कथावाचक ने की थी। इस ग्रन्थ में आठ कांड तथा 25 भाग हैं। इस रामायण में श्रीराम की कथा का वर्णन बढ़े ही मनोहारी ढंग से किया गया है।

रामचरितमानस

अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा 16 वीं सदी में रचित यह प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ को अवधी साहित्य की एक महान कृति माना जाता है। इसे सामान्यतः ''तुलसी रामायण'' या ‘तुलसीकृत रामायण'' भी कहा जाता है। रामचरितमानस भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। रामचरितमानस की लोकप्रियता अद्वितीय है।

वाल्मिकी रामायण

यह रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य है। इसमें श्रीराम की गाथा है। इसे आदिकाव्य तथा इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि'' भी कहा जाता है। संस्कृत साहित्य परम्परा में यह रामायण हिंदुओं का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय ग्रन्थ है।

रामरस सुधा

यह भगवान राम के चरित्र पर लिखित रामलीला की पुस्तक है। इसकी रचना बद्री सिंह चौहान ने की है।

वसुनायक रामायण

यह भी भगवान श्रीराम के चरित्र पर आधारित रामलीला की पुस्तक है। इसमें पुष्प वाटिका में फुलवारी प्रसंग का बड़ा ही रोचक वर्णन है। इसकी रचना ललितपुर के ही वसुनायक ने की है।

Edited By: Saurabh Chakravarty