जागरण संवाददाता, वाराणसी : पंडित राजकुमार शुक्ल चंपारण सत्याग्रह के महानायक थे। वे इस सत्याग्रह की नींव की ईंट थे, जिस पर स्वाधीनता संग्राम की मजबूत नींव खड़ी हुई। ऐसे महानायक को भारत रत्न मिलना ही चाहिए। ये बातें बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. एके जोशी ने कही। वे शुक्रवार को श्रीपा‌र्श्वनाथ विद्यापीठ परिसर में राजकुमार शुक्ल की 93वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

प्रो. जोशी ने पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि ब्रितानी हुकूमत के बर्बर अत्याचार और आर्थिक उत्पीड़न को लेकर जिस राष्ट्रीय भावना से उसके विरुद्ध संघर्ष का शंखनाद चंपारण में हुआ, वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इसके महानायक पंडित राजकुमार शुक्ल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को चंपारण की धरती पर आमंत्रित किया और उन्हें इसका नेतृत्व सौंपा। इस तरह त्याग बलिदान और राष्ट्रप्रेम के अद्भुत प्रणेता पंडित राजकुमार शुक्ल के सत्याग्रह के रास्ते महात्मा गांधी स्वाधीनता संग्राम के राष्ट्रीय फलक पर स्थापित हुए।

पूर्व राजभाषा उपनिदेशक अमरीशकांत ने चंपारण सत्याग्रह में पंडित शुक्ल के संघर्ष गाथा और उनके बहुमूल्य योगदान पर विस्तार से चर्चा की। बीएचयू व्याकरण विभाग के अध्यक्ष प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि देश के इतिहास में चंपारण सत्याग्रह को पंडित शुक्ल और गांधी के मिलन के ऐतिहासिक संयोग के रूप में देखा जाना चाहिए। इतिहास के पाठ्यक्रम में ऐसे महामानव को स्थान देना चाहिए, जिससे भावी पीढ़ी भी उनसे प्रेरणा ले सके। अध्यक्षता एवं स्वागत संबोधन संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष राजेश भट्ट ने किया। प्रो. कमलेश तिवारी, संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश कुमार, युवा प्रदेश उपाध्यक्ष डीके पाल वीणा देवी, अनंत राय, विनय कुमार, अनिल तिवारी, संतोष कुमार, विकास कुमार राय, राजेश त्रिवेदी आदि थे।

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