वाराणसी, जेएनएन। तीन जनवरी को कला संकाय के प्राचीन इतिहास विभाग में असिस्‍टेंट प्रोफेसर पद के लिए साक्षात्‍कार हुआ। इसमें अभ्‍यर्थी डा. कर्ण सिंह जो कि बीएचयू के ही छात्र रहे हैं, उनका आरोप है कि कुलपति ने साक्षात्‍कार के दौरान अंग्रेजी में जवाब देने के लिए दबाव बनाया। डा. कर्ण उसी दौरान राजभाषा और अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता का हवाला देते हुए हिंदी में साक्षात्‍कार के लिए अड़े रहे। बावजूद इसके उनकी नहीं सुनी गई और कहा गया कि यदि अंग्रेजी में साक्षात्‍कार नहीं दे सकते हैं तो बाहर जाइए। शुक्रवार को बीएचयू में शुरू हुए दो दिवसीय पुरातन छात्र समागम के उद्घाटन सत्र में छात्रों ने हिंदी विरोधी कुलपति लिखे स्‍लोगन के पोस्‍टर लहराते हुए नारेबाजी की है। अभी बीएचयू में 200 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है।

विवि का पक्ष है कि हमें इंस्‍टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा मिला है, इसके तहत बीएचयू को वैश्विक रैंकिंग में लाना है जिसके लिए ऐसी फैकल्‍टी की तलाश करनी हो जो ग्‍लोबल लैंग्‍वेज (अंग्रेजी) की अच्‍छी समझ रखता हो। उसी रात ट्वीट कर राष्‍ट्रपति, पीएमओ व मंत्रालय को शिकायत करते हुए अगले दिन पत्र भी भेजा गया। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर इसे आंदोलन का रूप देने की कोशिश शुरू हुई। इसके समर्थन में बड़ी संख्‍या में हिंदी भाषी छात्र आ गए हैं। अब होर्डिंग व पोस्‍टर वार शुरू हो गया है जिसके तहत कुलपति पर हिंदी विरोधी होने का आराेप लगाया जा रहा है।

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