मीरजापुर, जेएनएन। कोरोना महामारी के संकट से समाज का हर वर्ग परेशान है। व्यापार प्रभावित है तो उद्योग धंधे भी बुरी तरह चौपट हुए हैं। चुनार नगर में कुटीर उद्योग का रूप ले चुका प्लास्टर आफ पेरिस से बनने वाली लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति उद्योग भी कोरोना संकट से अछूता नहीं रह सका। मूर्ति उद्योग पर कोरोना के ग्रहण के चलते इस बार का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में आधे से भी कम रह गया है।

इस व्यवसाय से जुड़े अधिकांश व्यवसायी आज भी आगे के व्यापार को लेकर ऊहापोह की स्थिति में हैं। जिस तरह से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई हैं और यातायात के साधन आज भी पूरी तरह से सुचारू न होने पाने के कारण मूर्ति व्यवसाय से जुड़ा कच्चा माल भी कारखानेदारों को उपलब्ध नहीं हो सका है। आम तौर पर पिछले वर्षों में अगस्त महीने से मूर्ति खरीद के लिए बाहर के व्यापारियों का आना जाना शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है। कारखानों में प्रोडक्शन तो हो रहा है लेकिन औसतन आधे से भी कम। नगर के विभिन्न मोहल्लों में छोटे बड़े करीब साढ़े तीन सौ से अधिक कारखाने संचालित हो रहे हैं। इन कारखानों से सीधे-सीधे पांच हजार लोगों को रोजगार मिलता है और पांच हजार लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस व्यवसाय से जुड़े हैं। दीपावली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश का पूजन हर घर प्रतिष्ठान में होता है। यहां लगने वाले प्लास्टर आफ पेरिस की मूर्ति की मंडी में करीब बीस करोड़ रुपये का व्यवसाय होता था। इस बार यह व्यवसाय आधे से भी कम होने की संभावना है।

बोले व्यवसायी

कोरोना महामारी संकट का सीधा असर मूर्ति व्यवसाय पर पड़ा है। यातायात के साधन सुगम न होने पर बाहर से आने वाले व्यापारियों की आवक कम है। इस बार की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते उत्पादन कम हुआ है। सितंबर महीने से व्यापारियों के आने की उम्मीद है।

--अवधेश वर्मा

कोरोना संकट के चलते अप्रैल और मई में लगाए गए लॉकडाउन से काफी नुकसान हुआ। वह समय कच्चा माल तैयार करने का मुख्य समय होता है। इस बार व्यापार पर काफी प्रतिकूल असर पड़ेगा।

--रामदुलार प्रजापति

लॉकडाउन के दौरान कच्चा माल और पेंट इत्यादि की कीमतों में अचानक से बीस से पचीस फीसद वृद्धि होने के कारण भी उत्पादन पर असर पड़ा है। अभी भी कोरोना संकट बरकरार है। आगे व्यापार की क्या गति होगी भगवान ही मालिक है।

--मन्नू लाल यादव

दो महीने ट्रांसपोर्ट के साधन बंद होने के चलते कच्चा माल नहीं आ पाया। साथ ही संपूर्ण लॉकडाउन के दौरान काम धंधा पूरी तरह बंद था। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन कम हुआ है।

--लल्लन प्रसाद कुशवाहा 

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