वाराणसी, जेएनएन। खाड़ी सहित कई देशों में पूर्वांचल की सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। हरी सब्जियों का मौसम शुरू होते ही 350 टन से अधिक मटर, लौकी, गोल भंटा, हरी मिर्च का आर्डर दुबई व आेमान से मिला है। सब्जियों का निर्यात इसी माह में किया जाएगा। इसके अलावा अन्य कई और देशों से सब्जियों का निर्यात के लिए बातचीत अंतिम दौर पर चल रही है। पेरिशेबल कार्गो सेंटर की स्थापना के बाद बनारस फलों व सब्जियों के निर्यातक का हब बन चुका है।

पूर्वांचल के बनारस सहित आसपास जिलों के सब्जियों व फलों के निर्यात के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के माध्यम से वेजिटेबल एंड फ्रूट्स एक्सपोर्ट एसोसिएशन (वाफा) व फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन (एसपीआंर) के बीच समझौता हुआ था। समझौते में कृषि व खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) बताैर गवाह शामिल है। वाफा के माध्यम से एसपीआंर कई देशों में सब्जियों का निर्यात कर रहा है। इसके तहत गत वर्ष दिसंबर में पहली बार 15 टन हरी मिर्च का निर्यात किया गया था। बनारस व आसपास के जिलों की पतली व तिखी हरी मिर्च की मांग कई देशों में है। इसके अलावा गोल भंटा, सेम, लौकी, खीरा भी डिमांड खूब है। खाड़ी व यूरोपियन देशों में पूर्वांचल के मटर की जबर्दस्त मांग है। बनारस से फलों व सब्जियों का निर्यात हवाई व समुद्री मार्ग से एयर कार्गो कंटेनर से किया जा रहा है। एपीडा के सहायक महाप्रबंधक सीबी सिंह ने बताया कि हमारा उद्देश्य किसानों को उचित मूल्य दिलाना है ताकि उनकी आमदनी दोगुना किया जा सके। इस क्रम सब्जियों के निर्यात के लिए गत दिनों वर्चुअल क्रेता-विक्रेता की बैठक बुलाई गई थी। इस दौरान यूरोपीय संघ, गल्फनेशन, आस्ट्रेलिया, कोरिया, जापान, न्यूज़ीलैंड से भी हरी मिर्च, बॉटल गार्ड, ओकरा, बैंगन सहित अन्य सब्जियों की मांग आई थी। सर्वाधिक सब्जियों खाड़ी देशों में बनी हुई है। इसके अलावा कई और देशों में सब्जियों के निर्यात की संभावनाएं तलाशी जा रही है। बनारस ही नहीं अब पूरा पूर्वांचल सब्जियों के हब के रूप में विकसित हो चुका है।

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