जागरण संवाददाता, वाराणसी। प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (पीसीडीएफ) द्वारा संचालित पराग डेयरी का संचालन नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) को मिलने के बाद प्लांट का रुतबा एक बार फिर लौटने की उम्मीद जगी है। लोगों को याद आ रहा वह दौर जब पैकेट बंद दूध के मायने ही पराग हुआ करता था। बाद में धीरे-धीरे निजी कंपनियों ने दूध कारोबार और बाजार पर कब्जा कर लिया और डेयरी के आउटलेट्स पर उनकी होर्डिंग चस्पा होती चली गई। मंगलवार को मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्लांट का संचालन एनडीडीबी को देने पर सहमति बन गई। माना जा रहा है कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद बोर्ड इस आटोमेटेड प्लांट का महाराष्ट्र और गुजरात के प्लांटों की तर्ज पर पूरी क्षमता से काम करने लगेगा। अभी चार लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के प्लांट में साधन-संसाधन होने के बाद भी 25 हजार लीटर दूध की ही प्रोसेसिंग हो रही है।

प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (पीसीडीएफ) द्वारा संचालित डेयरी 1978 में स्थापित की गई। इस प्लांट को जुलाई 2019 में आटोमेटेड किया गया। इसके बाद भी कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए पूरी क्षमता से काम नहीं हो रहा था। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के नियंत्रण में आने के बाद डेयरी के पूर्ण क्षमता में संचालित करने की उम्मीद है। इस लिहाज से बोर्ड इसे विकसित करेगा। माना जा रहा है कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है ताकि पशुपालन को बढ़ावा मिल सके।

बोर्ड पांच साल करेगा संचालन, लेगा लाभांश

बोर्ड को संचालन के लिए भले ही प्लांट मिलने जा रहा हो लेकिन पूरी क्षमता से संचालन करते हुए पुरुना रुतबा लौटाने के लिए तत्काल खाली पदों पर तैनाती करनी होगी। हालांकि शेष कर्मचारी पूर्ववत काम करते रहेंगे। दूध की भरपूर मात्रा संग्रह कर के सिस्टम चलाना होगा। टैंकर की व्यवस्था करनी होगी। तापमान नियंत्रित करने के लिए बड़ी मात्रा में कूलर लगाने होंगे। डेयरी से दूरी बना चुके मिल्क पार्लर व बूथ के साथ ही एजेंट जोड़ने होंगे और उनकी संख्या भी बढ़ानी होगी। बोर्ड पांच साल तक माडल प्लांट के रूप में संचालित करेगा। कर्मियों का वेतन भी देगा और इसमें से लाभांश लेगा।

पीसीडीएफ के अधीन रहीं चुनौतियां

डेयरी के तमाम कर्मचारी पांचवें वेतनमान के साथ सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वेतन बढ़ना तो दूर पदोन्नति तक नहीं हो रही है। हां, जिम्मेदारियां जरूर बढ़ती रहीं। कर्मचारियों के फायदे की नीतियां तक लागू नहीं हुईं। वर्ष 2007-8 में ही बैकलाग से रिक्तियां भरी गईं, लेकिन नई भर्ती बंद है। तकनीकी स्टाफ का अभाव है। सिर्फ काम चलाया जा रहा है। इससे प्लांट का खर्च बढ़ गया है।

पराग डेयरी रामगनगर एक नजर में

रामनगर में पराग डेयरी बनी - 1978

आटोमेशन प्लांट चालू - जुलाई, 2019 से

संचालन - पीसीडीएफ (वर्तमान)

अब संचालन - एनडीडीबी

प्लांट की क्षमता - चार लाख लीटर

पाउडर प्लांट की क्षमता - दो लाख लीटर (20 फीसद काम शेष)

लिक्विड दूध प्लांट की क्षमता - दो लाख लीटर

रोजान प्रोसेसिंग - 25 हजार लीटर

दूध की आपूर्ति - 15 हजार लीटर

रोजाना बिक्री - 12-13 हजार लीटर

कर्मियों की संख्या - 31

शुरू में थे कर्मचारी - 200

वेतन नहीं मिला - पांच महीने से

2022 में होंगे निवृत्त - 95 फीसद

आउटसोर्सिंग - 50 कर्मचारी

छह जिलों से आता है दूध

डेयरी में वाराणसी समेत छह जिलों से दूध आता है। इसके लिए 424 दुग्ध समितियां काम कर रही हैं। इसमें वाराणसी में 2500 लीटर, गाजीपुर से 1500लीटर, चंदौली से 8000 लीटर, जौनपुर से 1500लीटर, भदोही से 300लीटर व मीरजापुर के चुनार से 1000 लीटर संग्रह किया जाता है। 

डेयरी की जरूरतों को लेकर पूरा प्रयास किया गया

डेयरी की जरूरतों को लेकर पूरा प्रयास किया गया। कर्मियों व किसानों के हितों का भी ध्यान रखा गया। दूध के संग्रहण और उसकी बिक्री को लेकर भी सक्रियता बनाई रखी गई। संसाधन के सापेक्ष पूरी क्षमता से संचालन का प्रयास किया गया।

- डा. एके शर्मा, जीएम, पराग डेयरी, रामनगर।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty